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समय पूर्व मानसून से किसान खुश, वैज्ञानिक चिंतित

पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के एक बड़े भाग सहित उत्तर भारत के अधिकांश इलाकों में इस बार मानसून ने समय से पूर्व दस्तक दी है। इन क्षेत्रों के किसान इस बारिश से काफी खुश हैं और खरीफ की फसल की बुआई भी शुरू कर दी है। लेकिन मौसम विज्ञानी निर्धारित समय से पूर्व होने वाली मानसून की बारिश से चिंतित है। जानकारों के मुताबिक इस मानसून में ब्रेक आने की संभावना है जो फसल के लिए हानिकारक हो सकता है। मौसम विज्ञानियों की भाषा में ब्रेक का अर्थ होता है हफ्ते भर तक लगातार बारिश का न होना। मानसून के सीजन में मुश्किल से दो और तीन ब्रेक होते हैं और एक लम्बी समयावधि का ब्रेक अच्छे मानसून का संकेत नहीं होता। भारत में एक वर्ष के दौरान मानसून दो बार दस्तक देता है, एक जून से सितम्बर के बीच और दूसरा अक्टूबर से दिसम्बर के बीच। सामान्यत उत्तर भारत में पहले मानसून के आने का समय जून माह की समाप्ति या जुलाई की शुरूआत है, लेकिन इस साल इन क्षेत्रों में यह दो सप्ताह पहले ही आ चुका है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) रविवार को दिल्ली, पंजाब और उ.प्र. के भागों में मानसून के आगमन की औपचारिक घोषणा कर चुका है। विभाग ने उत्तर भारत में इस साल सामान्य से काफी अच्छी बारिश की संभावना भी व्यक्त की है।पूना स्थित आईएमडी के नेशनल क्लाइमेट सेंटर के निदेशक माधवन राजीवन का कहना है मानसून के ब्रेक का सही-सही आंकलन करना मुश्किल काम है लेकिन जसे-ौसे मानसून आगे बढ़ता है हम इसके अनुमान के लगभग करीब होते जाते हैं। हम एसे सिस्टम पर काम कर रहे हैं जिससे आने वाले ब्रेक का 20 दिन पूर्व अनुमान लगायाड्ढr जा सके।

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  • Web Title: पूर्व मानसून से किसान खुश, वैज्ञानिक चिंतित