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शीला फिर सियासत में सक्रिय

नई दिल्ली प्रमुख संवाददाता। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद लगभग तीन महीने का राजनीतिक वनवास काटकर अब फिर से सियासी सक्रियता की तैयारी कर ली है। दीक्षित चुनाव पूर्व किए गए अपने दावों की हकीकत साबित करने के लिए समय की नजाकत को भांपते हुए अब सियासी अखाड़े में उतर गई हैं। दीक्षित ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लिए आयोजित रात्रिभोज में शिरकत कर इसकी शुरुआत भी कर दी।

चुनाव बाद यह पहला मौका था जब वह किसी सियासी मजमे का हिस्सा बनी हों। समझा जाता है कि बुधवार को फिर से गांधी ने दीक्षित को मिलने के लिए बुलाया है। इस दौरान दिल्ली में लोकसभा की सात सीटों के अलावा अगले विधानसभा चुनाव की रणनीति पर विचार विमर्श होने की संभावना है। राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बना चुकी दीक्षित ने हालिया साक्षात्कारों में विधानसभा चुनाव की हार के लिए पार्टी की अंदरूनी कलह को जिम्मेदार ठहराया है। समझा जाता है कि कांग्रेस हाईकमान ने पार्टी को तीन बार विधानसभा चुनाव जिताने वाली दीक्षित के अनुभव का अब लोकसभा चुनाव में लाभ उठाने के लिए उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी कर ली है।

सोमवार को मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में दीक्षित ने भी राजनीतिक तौर पर निष्क्रिय होने के सवाल पर माना कि वह चुनाव बाद बदले हालात के कारण सक्रिय नहीं थीं। हालांकि उन्होंने कहा कि अब वह सक्रिय हैं और बीते तीन महीनों में दिल्ली के विकास का पहिया रुकने तथा जनसुविधाएं प्रभावित होने जैसी कड़वी हकीकत से लोगों को अवगत कराएंगी। साथ ही इसके लिए वह संघर्ष का रुख अख्तियार करेंगेी। इस सिलसिले में महिला हैल्पलाइन सेवा के बंद होने जैसी अटकलों और हेल्पलाइन कर्मियों की समस्याओं को लेकर वह मंगलवार को उपराज्यपाल नजीब जंग से मिलेंगी।

ज्ञात हो कि पिछले सप्ताह हेल्पलाइन सेवा की संचालक सलाहकार खदीजा फारुकी से दीक्षित से मुलाकात कर हेल्पलाइन सेवा की परेशानियों से उन्हें अवगत कराया था।

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