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कोर्ट ने दिया बेटों से ठुकराई गई बुढ़ी मां को

नई दिल्ली, हेमलता कौशिक। तीन बेटों ने पिता की मौत के बाद अपनी बुढ़ी मां के सीधेपन का फायदा उठाया। बेटों ने मां को धोखे में रख सारी चल-अचल संपत्ति अपने नाम करा ली। मां जब तक सारा माजरा समझ पाती, बेटों की प्रताड़ना शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ी और संपत्ति की लालची संतानों ने वृद्वा को भुखमरी की कगार पर पहुंचा दिया। ऐसे हालात में बेटों द्वारा ठुकराई गई बुजुर्ग मां को अदालत ने सहारा दिया। अदालत ने महिला के खान-पान एवं स्वास्थ्य संबंधी अन्य खर्चो की जिम्मेदारी बेटों पर डाली गई है।

वृद्वा की देखभाल के लिए एक प्रोटेक्शन अधिकारी की नियुक्ति भी की गई है जो कि महिला की सुरक्षा और सेहत का ख्याल रखेगा। साकेत स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट शविानी चौहान की अदालत ने बदरपुर थाना पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि वृद्धा के साथ किसी भी अप्रिय घटना यानि मार-पिटाई की शिकायत किए जाने पर बेटों के खिलाफ तत्काल कानूनी कदम उठाया जाए। वहीं, तीनों बेटों पर बुजुर्ग मां को अलग-अलग खर्चा देने के आदेश भी दिए गए हैं।

अदालत ने प्रत्येक बेटे के लिए उसके रुतबे के हिसाब से गुजाराभत्ता देने की जिम्मेदारी डाली है। बुजुर्ग महिला के साथ कोई र्दुव्‍यवहार न हो और उसके खान-पान की व्यवस्था बनी रहे इस पर प्रोटेक्शन अधिकारी की लगातार नगिरानी रहेगी। इस बाबत प्रोटेक्शन अधिकारी को समय-समय पर अदालत में रिपोर्ट भी दाखिल करनी होगी। संपत्ति स्थानान्तरण के बाद मां को खाना देना किया बंदबदरपुर निवासी चम्पा देवी(बदला हुआ नाम) ने अदालत को बताया कि उसके तीन वविाहित बेटे और एक बेटी है।

पति की 30 मई 2008 को मौत हो गई थी। पिता की मौत के बाद उसके तीनों बेटों रामपाल, गंगाराम और शीशपाल ने उसे बहला-फुसलाकर सारी संपत्ति अपने नाम करा ली। उसके बाद बेटों और बहुओं की प्रताड़ना शुरू हो गई। रोजाना उसके साथ मार-पिटाई होना आम बात हो गई। बच्चों ने खाना देना भी बंद कर दिया। दाने-दाने को मोहताज वृद्वा को कमजोरी में कई बीमारियों ने घेर लिया। स्थिति बिगड़ते देख किसी पड़ोसी ने वृद्वा को अदालत का रास्ता दिखाया।

दो बेटे जवाब देने भी नहीं पहुंचे अदालतबेटों की क्रूरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वृद्वा की आपबीती सुन अदालत द्वारा जारी नोटिस पर भी तीन में से दो बेटे हाजिर नहीं हुए। सिर्फ एक बेटे ने अदालत में पहुंच अपनी गलती मानी और मां को प्रतिमाह गुजाराभत्ता देने की बात स्वीकारी। अदालत ने बुजुर्ग महिला के पक्ष में निर्णय करते हुए प्रोटेक्शन अधिकारी व स्थानीय थाना पुलिस को निर्देश दिए हैं कि तीनों बेटों को मां को खर्चा देने के लिए बाध्य किया जाए।

अगर कोई इसके लिए तैयार नहीं होता तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। कमाई के हिसाब से देना होगा गुजाराभत्ताअदालत ने तीनों बेटों पर उनकी कमाई के हिसाब से बुढ़ी मां को खर्चा देने को कहा है। बड़ा बेटा प्रतिमाह 15 हजार रुपये कमाता है तो वह मां को 16 सौ रुपये महीना देगा। दूसरा बेटे बेटे की आमदनी दस हजार रुपये महीना है वह भी मां को 16 सौ रुपये हर महीने देगा। सबसे छोटा बेटा एक प्राइवेट नौकरी करता है और उसकी तनख्वाह आठ हजार रुपये है।

इसलिए अदालत ने उसे कहा है कि वह मां को साढ़े11 सौ रुपये देगा। प्रत्येक तीन साल पर दस फीसदी बढ़ेगा गुजाराभत्तावृद्वा के पक्ष में आए विस्तृत फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया है कि वृद्वा को याचिका दाखिल करने की तारीख से लेकर आज तक का गुजाराभत्ता बकाया रकम के तौर पर बेटों को देना होगा। इस रकम का भुगतान छह महीने के भीतर करना होगा। इसके अलावा प्रत्येक तीन साल पर गुजाराभत्ते की राशि में दस फीसदी की बढ़ोतरी करनी होगी।

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