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एचएएल सौदे में आरोपों की सच्‍चाई पता लगाने की जरूरत

एचएएल सौदे में आरोपों की सच्‍चाई पता लगाने की जरूरत

सार्वजनिक क्षेत्र की हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को रॉल्स रायस कंपनी द्वारा विमान इंजिनों की आपूर्ति के 10,000 करोड़ रुपये के सौदे में रिश्वत के आरोपों पर सोमवार को सरकार ने कहा कि वह इस मामले में सच्‍चाई का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

भारतीय पक्ष की ओर से आधिकारिक सूत्रों ने कहा ऐसी अपुष्ट रिर्पोटें प्राप्त हुई हुई है कि इस सौदे में कुछ गड़बड़ी हुई है। इसलिये केन्द्रीय जांच ब्यूरो को मामले को देखने को कहा गया है। सूत्रों ने कहा जैसे ही वह (जांच एजेंसी) जांच पूरी कर लेगी, हमें उसकी जानकारी देगी और फिर हम उस पर आगे कार्रवाई करेंगे। हम सच्‍चाई का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा रक्षा मंत्री द्वारा सीबीआई को इस मामले को देखने के लिए कहना स्वाभाविक है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के यहां बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिये पहुंचने के कुछ ही देर बाद सरकार की तरफ से यह टिप्पणी आई है। ब्रिटेन की रॉल्स रायस कंपनी के साथ यह सौदा 2007 से 2011 के बीच हॉक प्रशिक्षण और जगुआर लड़ाकू विमानों के लिये इंजन आपूर्ति से जुड़ा है। एचएएल के सतर्कता विभाग ने आंतरिक तौर पर इसकी जांच में पहली निगाह में इन आरोपों में सच्चाई पाई है।

सौदे में रिश्वत के आरोप एचएएल द्वारा हाल में प्राप्त एक पत्र में सामने आये जिसमें दावा किया गया कि एचएएल के अधिकारियों को ठेका पाने के लिये एचएएल और कुछ अन्य विभागों के अधिकारियों को रिश्वत दी गई। एचएएल ने अपने मुख्य सतर्कता अधिकारी द्वारा आरोपों की जांच करवाई।

सतर्कता अधिकारी ने जांच में प्रथम दृष्टया पाया कि 2007 से 2011 के बीच  एचएएल ने अनुबंध की कई शर्तों का उल्लंघन किया। रिश्वत के आरोप इसी अवधि से जुड़े है। रक्षा मंत्री एके एंटनी के सामने जब एचएलए के मुख्य सतर्कता अधिकारी की सिफारिश के साथ यह मामला आया तो उन्होंने इसकी सीबीआई जांच का आदेश दिया।

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