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प्रसन्न हो पढ़ें, सीखें और याद रखें

प्रसन्न हो पढ़ें, सीखें और याद रखें

माता-पिता और कुछ बड़ी उम्र के बच्चे, स्मरण शक्ति बढ़ाने की दवाइयां इत्यादि लेने लगते हैं। इस समस्या का हल समझाया जाए, इससे पहले कुछ एक सिद्धांत सीखने और स्मरणशक्ति के बारे में जानना जरूरी है। शोध कहते हैं कि सीखना स्थाई होता है। अत: ये मान कर चलना पड़ेगा कि यदि कोई चीज सीखी है, पढ़ी है या उसका अभ्यास किया है तो वो दिमाग में अवश्य रहेगी। आइए थोड़ा सीखने और उससे संबंधित स्मरण और पुन: स्मरण को समझ लें।

सीखने यानी पढ़ाई और उसके विषयों की समझ का, अनुभव पर आधारित अध्ययन से बहुत गहरा रिश्ता है। साथ ही उससे जुड़ा अभ्यास भी उतना ही आवश्यक है। कुल मिला कर सीधे शब्दों में कहें तो जो पढ़ाई के विषय प्रेक्टिकल एप्लिकेशन द्वारा समझे जाते हैं, उनकी अध्ययन बहुत तेज और गहरा होता है।

जो विषय प्रेक्टिकल एप्लिकेशन से नहीं समङो जा सकते, उनके अभ्यास से उन्हें सीखा जा सकता है। साथ ही जब भी पढ़ा जाए, उसके साथ सकारात्मक प्रेरणा जुड़ी होनी आवश्यक है। तभी पढ़ाई से भाव संबंध ऐसा होगा कि पढ़ाई थकाएगी नहीं और न ही बोझ बनेगी।

ब्रेक्स भी हैं जरूरी
यदि बच्चा पढ़ाई कर रहा है तो माता-पिता को उसके लिए छोटे-छोटे रीजनेबल ब्रेक्स पर उसे प्लान करना चाहिए। जब बच्चों को लंबी और कमर कस के पढ़ाई करनी होती है तो बच्चे और मां-बाप दोनों ही सिर्फ विस्तृत कोर्स देख के ही थका महसूस करने लगते हैं।

सोच के देखिए, अगर आपके बेटे-बेटी को पता हो कि हर 2 या 3 गणित के सवाल हल करने के बाद वो अपना मनपसंद गाना सुन सकते हैं या आप उनके मन की कोई डिश या कॉफी या कुछ अच्छा सा उनके पास लेकर पहुंच जाएंगे तो उनके लिए न सिर्फ यह एक ब्रेक होगा, बल्कि उनका मन प्रसन्न रहेगा। साथ ही शारीरिक, मानसिक न्यूट्रिशन भी मिलेगा। ये है बात लर्निंग के सिद्धांत की।

मेमरी और रीकॉल
मेमरी एक साइंटिफिक प्रोसेस है, लगभग कंप्यूटर की तरह, पर उससे कहीं ज्यादा कॉम्पलेक्स। पुन:स्मरण यानी कंप्यूटर की फाइल सेविंग के बाद पुन: खोलना इस बात पर निर्भर करता है कि उसका स्टोरेज कितना है। इसलिए मस्तिष्क में स्टोरेज के मूलभूत सिद्धांत को समझ लिया जाए तो वह हमारे लिए काफी मददगार होता है। परीक्षा के लिए पढ़ने और परीक्षा में प्रश्नपत्र हल करने की पूरी प्रक्रिया के 3 हिस्से होते हैं-एनकोडिंग, स्टोरेज एंड र्रिटीवल।

एनकोडिंग का मतलब है कि जो इन्फॉर्मेशन पढ़ी जा रही है, वो मस्तिष्क में पहले से सुरक्षित मेमरी, नॉलेज, लर्निंग से कैसे संबंधित है। साथ ही वह कितनी अर्थपूर्ण जानकारी है।

इस प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए निम्न बातों को जानना आवश्यक है। जो भी कंटेंट याद करें या अभ्यास करें, उसे समझ के साथ याद करने की कोशिश करें। ध्यान रखें कि वह सब्जेक्ट/कंटेंट/टॉपिक उन विषयों से कैसे संबंधित हैं, जो पहले पढ़े गए हैं। उदाहरण के लिए साइन्स मेंकेमिस्ट्री के समीकरण रोजमर्रा से कैसे संबंधित हैं। इसके साथ कुछ विषयों का अभ्यास अति आवश्यक है। बार-बार अभ्यास करने से दिमाग में वह गहराई से उतरने लगते हैं अपने निशान छोड़ने में कामयाब हो जाते हैं।

संकेतों को न भूलें   
हर विषय के साथ एक अर्थपूर्ण संकेत को भी साथ जोड़ना मददगार रहता है। यह संकेत पुन:स्मरण के बहुत काम आते हैं। ठीक उसी तरह जैसे कंप्यूटर में कोई फाइल सेव करते समय उस फोल्डर का नाम, उसकी लोकेशन आदि भी साथ में सेव होती है।


कई बार विजुअल संकेत भी प्रयोग किए जा सकते हैं। जैसे, जो भी हम पढ़ रहे हैं, उसका चित्र दिमाग में बनाते चलें। ये चित्र संकेत का काम करेगा। एनकोडिंग का सीधा संबंध स्टोरेज से है और स्टोरेज के साथ पर्पज अटैच करना उससे भी ज्यादा जरूरी है। उदाहरण के लिए दिमाग को ये संकेत देना होता है कि कौन-सी इन्फॉर्मेशन किसलिए स्टोर की जा रही है। आपको पढ़ते समय ध्यान से सोचना होगा कि ये आप एग्जाम में स्वयं को टैस्ट करने के लिए पढ़ रहे हैं। यदि ये उद्देश्य लेकर पढ़ेंगे तो  आपका मस्तिष्क बिना भय के पूरा प्रयत्न करेगा। 

 

प्लानिंग एंड स्ट्रैटेजी

योजना बनाएं कि कितना समय है आपके पास, कितना पढ़ना है, किस पद्धति से पढ़ेंगे, रीडिंग एंड स्टडी,  प्रेक्टिकल आदि। यदि अध्ययन करना है तो लिखित अभ्यास को दो हिस्सों में बांटें। सबसे कठिन व सबसे आसान विषयों को चुनते समय मेरी सलाह है कि सबसे कठिन विषयों पर पहले ध्यान दें। काम को छोटे-छोटे, अधिक से अधिक एक से डेढ़ घंटे में बांटें। एक सब-टॉपिक पूरा होने के बाद छोटा-सा ब्रेक लें। बेहतर होगा कि वहीं किताब पर 20 मिनट सिर रख के सो जाएं। ये बहुत आवश्यक है, क्योंकि मस्तिष्क को बेहतर एनकोडिंग के लिए ठोस समय चाहिए होता है और इससे मेमरी को पक्का होने का समय मिल जाता है। मगर एक प्रकार के सब-टॉपिक या टॉपिक को बीच में ना तोड़ें।

कठिन विषयों के लिए रणनीति
रणनीति बनाएं कि जो कठिन विषय हैं, उन्हें  दोहराने के लिए कहां-कहां से मिदद मिल सकती है। अनुशासन प्रिय बच्चे ग्रुप स्टडी का विकल्प चुन सकते हैं। डिस्कशन ऑफ टॉपिक्स से  बेहतर लर्निंग कोई और नहीं। इससे एग्जाम में लिखते समय हर बच्चा अपने तरीके से उस विषय को देखता है, क्योंकि डिस्कशन से वो सब्जेक्ट बच्चे की लॉर्जर नॉलेज और मेमरी स्टॉक का एक सिस्टमेटिक हिस्सा बन जाता है। साथ ही अपने हर टॉपिक का एक ढांचा अवश्य नोट करें और इस ब्लूप्रिंट को एक अलग पन्ने पर दर्ज करते चलें। इस पूरे विषय का इस तरीके से र्रिटीवल करें, जिससे ये तीनों आवश्यक चीजें एक साथ हो जाएं। नोट किए गये ब्लूप्रिंट से आखिरी वक्त में दोहराना आसान हो जाएगा। आप सिर्फ वो ब्लूप्रिंट देखेंगे और पूरा सब्जेक्ट टॉपिक याद आ जाएगा।

एनकोडिंग, स्टोरेज एंड र्रिटीवल
जो भी कंटेंट याद या अभ्यास कर रहे हैं, उन्हें समझ के साथ याद करने की कोशिश करें। ध्यान दें कि वह सब्जेक्ट/कंटेंट/टॉपिक, पहले पढ़े गए विषयों से कैसे संबंधित है। उदाहरण के लिए साइन्स में कैमिस्ट्री के समीकरण रोजमर्रा से कैसे संबंधित हैं। इसके साथ कुछ विषयों का अभ्यास अति आवश्यक है। बार-बार अभ्यास करने से दिमाग में वह गहराई से उतरने लगता है।

कुछ जरूरी बातें
सेल्फ मोटिवेशन और सेल्फ स्टेंडर्ड ऑफ एक्सीलेन्स का जो प्रभाव आपकी पढ़ाई और एग्जाम परफॉरमेंस पर पड़ेगा, उसका कोई तोड़ नहीं है। खुद अपने आप से प्रतियोगिता करते हुए तैयारी करें। सकारात्मक सोच के साथ की गई तैयारी हमेशा दोगुना परिणाम देती है, क्योंकि उसके उद्देश्य की पूर्ति के लिए खुशी की ऊर्जा भी मिलती है।
(लेखिका नीलिमा पांडे साइकोलॉजिस्ट हैं)

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