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इन्टर्नशिप से बढ़ती है सीवी की वेल्यू

इन्टर्नशिप से बढ़ती है सीवी की वेल्यू

किताबी ज्ञान हासिल कर लेने के बाद जरूरी नहीं कि किसी भी प्रोफेशनल इंडस्ट्री में आप बेहतर काम कर सकें। किसी भी प्रोफेशनल कोर्स की ट्रेनिंग के बाद विद्यार्थियों को इस बात की भी जानकारी दी जाती है कि इंडस्ट्री में काम कैसे होता है। इंडस्ट्री में मिलने वाली इसी प्रेक्टिकल ट्रेनिंग को इन्टर्नशिप कहा जाता है।

इन्टर्नशिप न की जाए तो रोजगार हासिल करने में बहुत सी दिक्कतें आ सकती है। काम का सही पता न होना ही युवाओं को रोजगार से अधिक दिन के लिए दूर रखता है। जब एक कॉलेज स्टूडेंट किसी कंपनी में इंटर्नशिप शुरू करता है तो पहली बार उसे  प्रेक्टिकल वर्क के बारे में जानने का मौका मिलता है। ऑफिस का प्रोफेशनल माहौल कई बार स्टूडेंट्स के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है, लेकिन कुछ खास तैयारी और अच्छी इंटर्नशिप से आप कंपनी और उसके एंप्लॉइज के साथ एक मजबूत प्रोफेशनल रिलेशनशिप बना सकते हैं। मुमकिन है कि आगे चल कर इसका फायदा भी आपको जॉब के रूप में मिले।

इंटर्नशिप क्या है?
विशेषज्ञों का कहना है कि ‘इन्टर्नशिप वह प्रक्रिया है, जिसमें विद्यार्थियों को खुलने और काम करने के अच्छे अनुभव प्राप्त करने का मौका मिलता है। इन्टर्नशिप एक ऐसा मौका होता है, जिसमें थ्योरी और प्रेक्टिकल दोनों के मेल के साथ काम के माहौल को देखने का भी मौका मिलता है।’ इन्टर्नशिप विद्यार्थियों के सीवी की वेल्यू भी बढा़ती है। और तो और जहां युवा इन्टर्नशिप करते हैं, वही से उन्हें काम करने की ऑफर भी मिल जाती है। साथ ही उन्हें कैम्पस रिक्रूटमेंट के दौरान भी काम की कई अच्छी ऑफर्स मिलती हैं।’

टिप्स फॉर इंटर्न
इंटर्नशिप करने के दौरान इंटर्न को कुछ ऐसी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी हो जाता है, जो उसके भविष्य में काम आ सकती हैं। जैसे-एक इंटर्न के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि संस्था का फॉर्मल और इन्फॉर्मल रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर क्या है, साथ ही इंटर्नशिप के दौरान उन्हें किसे रिपोर्ट करना होगा, यह जानना बेहद जरूरी है। इसके लिए पहले दिन ही वहां के एचआर मैनेजर से मिल कर इंटर्नशिप की डिटेल्स पता कर लें कि आपको किसके अंडर  इंटर्नशिप करनी होगी, ताकि किसी एक सीनियर की गाइडेंस में काम करने और सीखने का मौका मिल सके।

इंटर्नशिप करने वाले फ्रेशर्स को कोशिश करनी चाहिए कि वह अनुपस्थित न हों। इस दौरान समय का खासतौर पर ध्यान रखें। इससे आप सीनियर्स और मैनेजमेंट को इंप्रेस कर पाएंगे। उन्हें लगेगा कि आप काम को लेकर गंभीर हैं। इंटर्नशिप के दौरान स्टूडेंट्स को अच्छा परफॉर्म करना होता है।

इससे आगे के लिए मौके बनने के आसार बनते हैं, लेकिन ये तभी हो सकता है, जब एक इंटर्न सिर्फ अपने काम से

मतलब रखे।
एक स्टूडेंट जब इंटर्नशिप के लिए किसी कंपनी में जाता है तो उसका मकसद सीखना होता है। इसलिए कोशिश यही होनी चाहिए कि जो असाइनमेंट मिले, उसे स्वीकार करे।

इंटर्नशिप के दौरान एक इंटर्न के लिए  सोशल स्किल्स काफी काम आती हैं। ऑफिस में दोस्ताना व्यवहार रखते हुए उनके सम्मान का भी ध्यान रखें।

इंटर्नशिप करने के फायदे
एक व्यावसायिक माहौल में काम करने का मौका मिलता है।
प्रोफेशनल नेटवर्क और कॉन्टेक्ट्स बढ़ते हैं।
पैसा भी कमाया जा सकता है।
स्टूडेंट के आत्मविश्वास को बढा़ता है, जिससे उसकी स्किल, टेलेंट और क्षमता बढ़ती है।
भविष्य के लिए अच्छे अनुभव प्राप्त होते हैं।

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