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नरेंद्र मोदी की लहर के सहारे भाजपा

नरेंद्र मोदी की लहर के सहारे भाजपा

झारखंड गठन के बाद राज्य में क्षेत्रीय दलों का उदय है, जो भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों को चुनौती दे रही हैं। ऐसे में भाजपा मोदी लहर के सहारे चुनाव मैदान में उतरेगी। पार्टी को उम्मीद है कि मोदी की लोकप्रियता को वह भुना मिशन 2014 में जीत का परचम लहरा पाएगी।

दरअसल झारखंड़ के गठन के बाद से ही राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल का दौर जारी है। अविभाजित बिहार में जहां भाजपा का दबदबा था। वहीं राज्य गठन के बाद हुए पहले लोकसभा चुनाव में उसे मुंह की खानी पड़ी। वर्ष 2009 चुनाव में उसकी स्थिति में कुछ सुधार आया और पार्टी 14 में से आठ सीट अपनी झोली में डालने में कामयाब हुई। हालांकि, दो साल बाद उपचुनाव में पार्टी को जमशेदपुर सीट गंवानी पड़ी।

वर्ष 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव की जमीनी हकीकत पहले के चुनावों से अलग है। यहां पर भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियों की मुश्किल उन्ही से अलग हुए नेताओं की बनाई गई क्षेत्रीय पार्टियां हैं। जो तेजी से भाजपा और कांग्रेस के वोटबैंक में सेंध लगा रही है। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही शंकित हैं। लेकिन भाजपा को अपने प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पर भरोसा है। उनको उम्मीद है कि पार्टी पूरे देश की तरह झारखंड में भी मोदी की लोकप्रियता को भुना पाएगी। 

हालांकि, कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए ही अपनी ताकत बनाए रखना आसान नहीं होगा। वर्ष में भाजपा से अलग होकर बाबूलाल मरांडी ने झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक (जेवीएम-पी) गठित की और झारखंड मुक्ति मोर्चा के गढ़ माने जाने वाले कोडरमा से आसान जीत दर्ज की। 15 वीं लोकसभा में उनके दो सदस्य हैं। इस चुनाव में उनके प्रभाव का विस्तार होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। भाजपा की अंदरुनी लडमई भी उसे नुकसान पहुंचा सकती है।

मौजूदा हालात: तमाम चुनाव सर्वेक्षण इशारा कर रहे हैं कि भाजपा 2014 के लोकसभा चुनाव में राज्य की आठ सीटों पर कब्जा कर सकती है। लेकिन इस संभावित जीत का श्रेय भी मोदी को जाएगा।

इन सीटों पर रहेगी नजर
लोहारदग्गा: जनजातीय समुदाय के दो पूर्व आईपीएस रामेश्वर उरांव (कांग्रेस) और अरुण उरांव (भाजपा)आमने सामने होंगे।

जमशेदपुर: पूर्व पुलिस अधिकारी और जेवीएम-पी के अजय कुमार की कोशिश दोबारा जीत की होगी। अर्जुन मुंडा के मना करने के बाद भाजपा में उम्मीदवार को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। कम से कम छह वरिष्ठ नौकरशाह भी चुनाव मैदान में ताल ठोकेंगे। धनबाद, गिरीडीह, पलामू, बोकारो और रांची से तैयारी

आसान नहीं झारखंड की डगर
अगर चुनाव में खंडित जनादेश आता है तो झारखंड की 14 सीटों की भूमिका अहम होगी। क्षेत्रीय दलों का साथ भाजपा और कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम कर सकता है।

चार अहम सीट जिन्हें जीतना इज्जत का सवाल
जातीय समीकरण: हिंदू, ईसाई, जनजातीय, मुस्लिम, पिछड़ी जाति
मुख्य पार्टियां: कांग्रेस, जेएमएम, भाजपा, एजेएसयू, जेवीएम

रांची
शहरी, अर्ध शहरी और ग्रामीण मतदाता हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय एकमात्र कांग्रेसी थे जिन्होंने 2009 में सीट जीती थी।
जाति/ धर्म: हिंदू, ईसाई, मुस्लिम, जनजातीय
साक्षरता दर: 77.13 प्रतिशत
राजनीतिक प्रतिबद्धता: कांग्रेस
मुद्दे: विकास, सांप्रदायिक सौहाद्र्र
इन पार्टियों का है प्रभाव: भाजपा, एजेएसयू
मतदान प्रभावित करने वाले चेहरे: सहाय, सुदेश महतो

जमशेदपुर
औद्यागिक क्षेत्र वाला महानगर है। जेवीएम पार्टी के सदस्य और पूर्व पुलिस अधिकारी अजय कुमार हैं मौजूदा सांसद।
जाति/ धर्म: हिंदू, जनजातीय, पिछड़ी जातियां, मुस्लिम
साक्षरता दर: 85.94 प्रतिशत
राजनीतिक प्रतिबद्धता: जेवीएम
मुद्दे: कानून व्यवस्था, रोजगार
इन पार्टियों का है प्रभाव: भाजपा, जेएमएम
मतदान प्रभावित करने वाले चेहरे: अजय कुमार, अर्जुन मुंडा

दुमका
राज्य के दूसरी राजधानी के रूप में प्रसिद्ध इस क्षेत्र में जेएमएम का दबदबा है। 80 के दशक से शिबू सोरेन कर रहे हैं क्षेत्र का प्रतिनिधित्व।
जाति/ धर्म: जनजातीय
साक्षरता दर: 62.54 प्रतिशत
राजनीतिक प्रतिबद्धता: जेएमएम
मुद्दे: जनजातीय अधिकारों की सुरक्षा, पलायन, विकास
इन पार्टियों का है प्रभाव: जेवीएम
मतदान प्रभावित करने वाले चेहरे: शिबू सोरेन

हजारीबाग
कोयला खदानों से परिपूर्ण इस सीट पर यशवंत सिन्हा का कब्जा है। लेकिन खनिज संपन्न इस क्षेत्र में गरीबी का स्तर बहुत ऊंचा है।
जाति/ धर्म: हिंदू, पिछड़ी जाति, मुस्लिम
साक्षरता दर: 90.14 प्रतिशत
राजनीतिक प्रतिबद्धता: भाजपा
मुद्दे: विस्थापन, भ्रष्टाचार, अल्पविकास
इन पार्टियों का है प्रभाव: एजेएसयू
मतदान प्रभावित करने वाले चेहरे: यशवंत सिन्हा

ताकत: जमीन से जुड़ी पार्टी के रूप पहचान। शिबू सोरेन जैसे जननेता और अल्पसंख्यकों का समर्थन।
चुनौती: मोदी लहर, हेमंत सोरेन सरकार का खराब प्रदर्शन, भ्रष्टाचार के आरोप और आपसी मतभेद।

ताकत: प्रदेश इकाई के नए नेता। पार्टी को भरोसा है कि प्रदेश की मौजूदा सरकार में भाजपा की उपस्थिति से सत्ता विरोधी लहर का फायदा होगा। 
चुनौती: मोदी लहर के मुकाबले राहुल गांधी पार्टी कार्यकर्ताओं को उत्साहित नहीं कर पा रहे हैं। मजबूत उम्मीदवारों की कमी

ताकत: करिया मुंडा, अर्जुन मुंडा और यशवंत सिन्हा जैसे लोकप्रिय नेता। आठ साल राज्स की सत्ता पर काबिज रही मोदी लहर की मौजूदगी। 
चुनौती: मौजूदा सांसदों को सत्ता विरोधी लहर का करना होगा सामना। पार्टी के भितर गुटबाजी दूसरी बड़ी चुनौती।

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