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डीएमआईसी से जगी विकास की आस

दिल्ली-मुंबई-इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) परियोजना का शुभारंभ होने से उत्तर प्रदेश की सूरत बदलने वाली है। इस परियोजना के तहत बनने वाले टाउनशिप में 33,000 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश के अवसर के साथ ही 58,000 कारीगरों को रोजगार मिलने की संभावना है।

इस टाउनशिप का 51 प्रतिशत भाग औद्योगिक भू-उपयोग के लिए आरक्षित होगा। ग्रेटर नोएडा के राष्ट्रीय राजधानी के निकट होने के कारण इस परियोजना के स्थापित होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उद्योगों को न केवल विश्वस्तरीय अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध होंगी, बल्कि अपने उत्पाद देश के अन्य हिस्सों व विश्व के बाजार तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

दरअसल, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के दोनों ओर लगभग 150-200 किलोमीटर की पट्टी में प्रस्तावित डीएमआईसी के प्रभाव क्षेत्र का 12 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में पड़ता है तथा राज्य के 12 जनपदों के 36,068 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में प्रस्तावित है। दादरी में ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और वेस्टर्न डेडिकेटेड फेट्र कॉरिडोर का जंक्शन होगा, जिससे उत्तर प्रदेश को काफी लाभ मिलेगा।

लगभग 1483 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में दो विकास क्षेत्र चिह्न्ति किए गए हैं, पहला दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र तथा दूसरा मेरठ-मुजफरनगर औद्योगिक क्षेत्र। इस पर तीन अर्ली बर्ड परियोजनाएं प्रस्तावित हैं जिनमें ग्रेटर नोएडा में एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप, बोडाकी में एक मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब तथा दादरी मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब सम्मिलित हैं।

पहली अर्लीबर्ड परियोजना-एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप ग्रेटर नोएडा लगभग 740 एकड़ में विकसित की जानी है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के पास इस परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध है। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां कार्य करने वाले लोगों के लिए आवास, संस्थागत व व्यावसायिक सुविधा तथा अन्य अवस्थापना सुविधाएं एक स्थान पर उपलब्ध होंगी।

टाउनशिप के प्रमुख अवस्थापना विकास के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने 50-50 अंशधारिता तय कर संयुक्त उपक्रम कंपनी बनाने को स्वीकृति पहले ही दे दी है। इसका खर्च डीएमआईसी ट्रस्ट तथा राज्य सरकार की ओर से ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा वहन किया जाएगा।

अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त आलोक रंजन ने बताया कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा एशिया का सबसे बड़ा नियोजित औद्योगिक क्षेत्र है। एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप ग्रेटर नोएडा में स्थापित होने पर इस क्षेत्र में मैन्युफैरिंग सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने बताया कि डीएमआईसी के अंतर्गत इस टाउनशिप में 33,000 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश के अवसर सृजित होंगे और 58,000 कारीगरों को रोजगार मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर के अलावा कोलकाता-अमृतसर औद्योगिक कॉरिडोर के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है। ये दोनों कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के दादरी में मिलेंगे। दोनों कॉरिडोर के पूरा हो जाने के बाद फल, सब्जी सहित तमाम वस्तुओं को मुंबई के जवाहर लाल नेहरू बंदरगाह पर पहुंचाने में केवल 15 घंटे लगेंगे, जिसमें अभी 14 दिन तक का समय लग जाता है।

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