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ग्रामीणों ने नक्सलियों की मुखालफत की हिम्मत जुटाई

नावागढ़। सरयू एक्शन प्लान के तहत इस गांव के विकास की योजनाएं बनाई गईं। गांव में पीसीसी सड़क बन रही थी। गांव के लिए यह सड़क लाइफ लाइन साबित होनेवाली थी।

सड़क बनाने का काम शुरू ही हुआ था कि 27 फरवरी को नक्सिलयों ने इस पर रोक लगा दी। ठेकेदार को संदेश भेज दिया कि बिना उनकी अनुमित के सड़क नहीं बनेगी। ठेकेदार के मजदूर भी भाग गए। जब ग्रामीणों को नक्सिलयों के फरमान की जानकारी मिली, तो उन्हें बहुत दुख हुआ।

उनका कहना था कि बिना किसी वजह के नक्सिलयों ने सड़क निर्माण बंद करा दिया है। इसके बाद ग्रामीण एकजुट होने लगे। ग्रामीणों ने नक्सिलयों की मुखालफत करने का फैसला किया।

यह मुखालफत हिंसात्मक न होकर गांधीवादी तरीके से करने का फैसला किया गया। गांव के हिरओम प्रसाद ने सत्याग्रह करने की घोषणा कर दी। गांव के अन्य लोगों ने भी उनका साथ देने का वचन दिया।

दो मार्च को हिरओम प्रसाद तथा गांव के अन्य लोग हाथों में तिरंगा लेकर पहुंच गए सड़क निर्माण स्थल पर। उन्होंने तिरंगे के साथ सत्याग्रह शुरू कर दिया। ठेकेदार को बुला कर बता दिया कि जब तक सड़क पूरी तरह बन नहीं जाएगी, वे लगातार सत्याग्रह करेंगे।

ठेकेदार को भी हिम्मत आई। उसने नक्सिलयों द्वारा रोका गया काम दोबारा शुरू कर दिया। हिरओम ने कहा कि जब तक काम पूरा नहीं होता है, तब तक वे लोग इसी तरह तिरंगा के साथ सत्याग्रह करते रहेंगे। उनके अनुसार गांव के ही कुछ लोग नक्सिलयों को गलत सूचना देकर भ्रिमत करते हैं। इससे गांव का विकास रुक जाता है। विकास के लिए अब बंदूक के खिलाफ सत्याग्रह करना आवश्यक हो गया है। तिरंगा हमारे सत्याग्रह को पूरी शिक्त प्रदान कर रहा है।

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