DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आदिवासी जमीन गिरवी रखने पर आदेश सुरक्षित

ामीन गिरवी रख कर आदिवासियों को हाउसिंग और एजुकेशन लोन नहीं दिये जाने से संबंधित मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद हाइकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कार्यवाहक चीफ जस्टिस एमवाइ इकबाल और जस्टिस एके सिन्हा की कोर्ट ने दो सप्ताह बाद इस पर फैसला सुनाने की बात कही है। 16 जून को कोर्ट ने इस मामले को एक अच्छा मामला बताते हुए सुनवाई के लिए स्वीकार भी कर लिया।ड्ढr इस संबंध में फेलिक्स तांबा ने याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि सरकार द्वारा नियमों में बदलाव लाने के बाद आदिवासियों को जमीन गिरवी रख कर बैंक लोन नहीं दे रहा है। इससे उन्हें परशानी हो रही है। सरकार की ओर से कहा गया कि आदिवासी हित को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया गया था, लेकिन अब सरकार शीघ्र ही यह छूट देने जा रही है। इसकी अधिसूचना जल्द ही जारी की जायेगी। इसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया। प्रार्थी की ओर से मनोज टंडन और सरकार की ओर से महाधिवक्ता एसबी गाड़ोदिया ने बहस की। बदसलूकी के लिए खेद जताया, फैसला सुरक्षितर शिकायतकर्ता प्रदीप यादव भी उपस्थित थे। प्रदीप यादव का आरोप था कि इस साल सात जनवरी को जब वह दिल्ली गये तब पूर्व सूचना भेजे जाने के बावजूद उन्हें झारखंड भवन में कमरा नहीं दिया गया। उस दिन वह एमएडीएलआर विमान से रांची से दिल्ली गये थे। विमान काफी लेट था, जिसके कारण वह रात को 10.30 बजे दिल्ली पहुंचे थे। जब वह झारखंड भवन पहुंचे, तो वहां के कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि उनके लिए राजस्थान भवन में कमरा आरक्षित है। यादव ने राजस्थान भवन जाने के लिए गाड़ी की व्यवस्था करने को कहा। कर्मचारियों ने इसके लिए उन्हें ओएसडी से संपर्क करने को कहा। जब विधायक ने ओएसडी से बात की तो उन्होंने तबीयत खराब होने की बात कही। इसपर काफी देर तक दोनों के बीच तकरार हुई। विधायक यादव को झारखंड भवन में कमर की मांग को लेकर धरने पर बैठना पड़ा। घटना से क्षुब्ध विधायक ने इसकी शिकायत विधानसभा अध्यक्ष, सीएम के पीएस और सीएस से की थी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: आदिवासी जमीन गिरवी रखने पर आदेश सुरक्षित