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75 हजार वर्षो से गतिशील है सिंहेश्वर का इतिहास

सिंहेश्वर/मधेपुरा ’ हि.टी। सिंहेश्वर मेला में एक और रत्न के रूप में जुड़ते हुए सिंहेश्वर महोत्सव का आगाज रविवार से मवेशी हाट मैदान में शुरू हुआ। हालांकि विभिन्न कार्यक्रमों को लेकर जिला प्रशासन की व्यस्तता और आदर्श आचार संहिता की पावंदियों की वजह से इसार के महोत्सव के शुभारंभ सादे समारोह में ही हुआ माना जा रहा है।

वैसे प्रशासन ने अगले वर्ष समारोह को भव्य कराने का आश्वासन जरूर दिया। पर्यटन विभाग के सौजन्य और जिला प्रशासन के तत्वावधान में महोत्सव का उद्घाटन डीएम गोपाल मीणा, एसपी आनंद कुमार सिंह सहित अन्य अतिथियों ने किया। बताया गया कि महोत्सव में सोमवार को पर्यटन विभाग के प्रधान सचिवों प्रधान भी शिरकत करेंगे।

इस मौके पर सिंहेश्वर महोत्सव से संबंधित स्मारिका और डक्यूमेंट्री फिल्म ‘कथा सिंहेश्वर धाम का’का विमोचन भी किया गया। सिंहेश्वर मंदिर पर कई पुस्तकों की रचना करने वाले साहित्यकार हरशिंकर प्रसाद शलभ और श्रृंगी ऋषि की प्रतिमा स्थापित करने वाले गोपाल पंडित को सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआतोीएस गुरुकुल के छात्रों के गायन से हुआ। माया विद्या निकेतन के छात्रों ने शवि वंदना गाया। इसकेोाद डॉ. रवि रंजन और प्रो. अरुण कुमार ने शास्त्रीय गायन से श्रोताओं का मनमोहा। देर शाम भागलपुर से आये एसके ग्रुप द्वारा आरकेष्ट्रा की प्रस्तुति की गयी।

कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए साहित्यकार हरिशंकर प्रसाद सलभ ने कहा कि सिंहेश्वर में कई इतिहास गढ़े गये लेकिन सिंहेश्वर ने अपने लिए कभी कोई इतिहास नहीं लिखा। लेकिन पुराणों में सिंहेश्वरनाथ की महिमा का बखान मिलता है।

सिंहेश्वर का इतिहास पिछले 75 हजा वर्षो से निरंतर गतिशील है। उन्होंने इस मौके पर जिला प्रशासन से सिंहेश्वर में ऋषि श्रृंगी संस्थान खोलने की मांग भी की। कहा कि इससे इसके इतिहास पर और अधिक शोध हो सकेगा।

एनआरआई विद्यानंद सिंह ने सिंहेश्वर महोत्सव को एक अच्छी शुरुआत बताते हुए सामाजिक धर्मशाला बनवाने की घोषणा की। गोपाल पंडित ने कहा कि श्रृंगी ऋषि ही एक ऐसे महान ऋषि थे, जिन्होंने कभी किसी के साथ शास्त्रार्थ नहीं किया, कभी किसी के खिलाफ शस्त्र उठाया, न ही किसी को श्राप दिया।

उन्होंने कहा कि यदि देश और वशि्व में शांति समन्वय स्थापित करना है तो श्रृंगी ऋषि के मार्ग पर ही चलकर संभव है। उन्होंने कहा कि सिंहेश्वर का इतिहास बैद्यनाथ धाम से भी प्राचीन हैं। लेकिन अनन्य कारणों से इसे वह पहचान नहीं मिल पायी है।

मुख्य अतिथि एसपी आनंद कुमार सिंह ने कहा कि सिंहेश्वर के कृपा से ही उन्हें इस धरती पर सेवा करने का मौका मिला। उन्होंने महोत्सव के आयोजन में हर संभव सहयोग देने और शहरी वासियों से भी महोत्सव को सफलोनाने की अपील की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डीएम गोपाल मीणा ने अपनी ववशिता जतायी कि इंटर -मैट्रिक की परीक्षाएं और चुनाव की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन काफी व्यस्त रहा। उन्होंने यह भी बताया कि महोत्सव के लिए आवंटन भी देर से प्राप्त हुआ। ऐसे में इस बार महोत्सव को भव्य रूप प्रदान नहीं किया जा सका।

बावजूद इसके उन्होंने तीन दिवसीय महोत्सव को सफल बनाने के लिए साके सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष के महोत्सव को लेकर अभी से तैयारी शुरू की जायेगी।

धन्यवाद ज्ञापन एसडीओ वमिल कुमार सिंह ने किया। मंच संचालन मानव कुमार और पृथ्वीराज यदुवंशी ने किया। स्वागत जयकृष्ण यादव ने किया। इस मौके पर एसडीपीओ कैलाश प्रसाद, डीईओ सह मेला प्रभारी चंद्रदेव प्रसाद, नित्यानंद सिंह ,डॉ. भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी , प्रो. श्यामल किशोर प्रसाद, डॉ.शांति यादव, डॉ. दविाकर प्रसाद सिंह,उपप्रमुख राजेश रंजन झा सहित अन्य गणमान्य मौजूद थे। ं।

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