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चाय चौपालः इस बार समुद्र मंथन से अमृत जरूर निकलेगा

फिरोजाबाद। हिन्दुस्तान टीम। यूं तो हर सासंद का ईमान होना चाहिए, लेकिन पहले वह एक इंसान होना चाहिए। हिन्दुस्तान कार्यालय में रविवार को चाय चौपाल के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने जब अपने होने वाले सांसद के अंदर मौजूद होने वाली खूबियों पर चर्चा की तो हर कोई मतदाता से इस बार के चुनाव में अपने वोट की ताकत को दिखाने की बात कहता नजर आया।

चाय चौपाल की शुरुआत में जैसे ही हिन्दुस्तान की टीम ने आमंत्रित लोगों के सामने प्रश्न रखा कि आपकी नजर में एक वोट का क्या महत्व है तो सभी अपने विचारों को रखने लगे।

मयंकराज भटनागर ने कहा कि फिरोजाबाद में इस बार एक चिंगारी उठनी चाहिए। यहां दमकलें आग बुझाने के लिए काफी हैं, लेकिन आग नहीं लग रही। इस बार बदलाव की आग लोगों के दिलों में लगे तो ये दमकलें भी उसे नहीं बुझा पाएंगी। उन्होंने कहा कि एक वोट लोकतंत्र को बदल सकता है।

सत्ता से किसी को बेसत्ता कर सकता है तो हमें चाहिए कि इस बार सांसद भी ऐसा चुना जाए जो जिले और देश में बदलाव लाए। नवल सिंह एडवोकेट ने सीधे शब्दों में कहा कि हर बार हम पुरानों पर ही अपना दांव खेलते हैं तो इस बार हमें नया सोचना चाहिए और नई सोच के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग करना होगा।

प्रधानाचार्या प्रीती श्रोती ने कहा कि जब समुद्र मंथन से अमृत निकाला जा सकता है तो लोकतंत्र के चुनाव में एक अच्छा प्रत्याशी भी जिताकर भेजा जा सकता है। स्थानीय प्रत्याशी होना जरूरी है। जब कोई घटना हो जाती है तो गुहार लगाने कोई बाहर नहीं अपने घर में जाएगा। ये सोच इस बार लानी होगी।

जब लोगों से पूछा गया कि क्या पार्टीवाद पर वोट दिया जाना चाहिए तो सबने इसका विरोध किया। युवा कांग्रेस नेता संदीप तिवारी ने कहा कि ऐसा करने से हम विकास के बारे में नहीं सोच सकते।

अच्छे देश के निर्माण के बारे में नहीं सोच सकते। हां अगर कोई पार्टी का अच्छा प्रत्याशी है तो उसे चुनने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। समाजसेवी पीके जिंदल ने कहा कि हमसे कोई दबंगई से वोट नहीं ले सकता। वोट का महत्व तो हमें पता होना चाहिए और जब हम वोट डालते हैं तो कोई नहीं जानता कि हम किसे वोट दे रहे हैं, ऐसे में बदलाव के साथ वोट डालने में क्या हर्ज हो सकता है।

जब पूछा गया कि क्या महिलाओं को अपने परिवार के कहने से वोट डालना चाहिए तो महिला होने के नाते शिक्षिका और ज्योतिषाचार्या डॉ.लक्ष्मी देवी शर्मा ने विरोध किया।

बोलीं हमें संकीर्ण मानिसकता से बाहर आना चाहिए। महिला प्रधान चुन जाती हैं तो पति प्रधान हो जाता है, विधायक चुन जाती हैं तो विधायक प्रतिनिधि बन जाते हैं। सांसद बनने पर सांसद प्रतिनिधि बन जाते हैं। आखिर जब उन्हें चुनने के लिए आगे किया जाता है तो काम क्यों नहीं करने दिया जाता।

इस बार महिलाओं को वोट देते समय अपनी सोच का परिचय देना होगा। प्रधानाचार्य डॉ.मुकेश शर्मा ने भी समर्थन कर कहा कि समाज में बदलाव के लिए खुद में बदलाव की जरूरत है।

हम दूसरों की बहन-बेटियों को प्रोत्साहित करते हैं और जब खुद की बारी आती है तो पीछे हटते हैं। इस बार सांसद चुनते समय महिलाओं को भी स्वतंत्रता का अहसास होने दिया जाना चाहिए।

सांसद द्वारा क्या मूलभूत समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया जाता, इस सवाल पर जिला क्रिकेट संघ के सचिव केशव लहरी बोले कि अगर ऐसा होता तो अब तक फिरोजाबाद के युवा खेलकूद में काफी आगे होते। ये सोच किसी सांसद में नहीं दिखी और पिछले दशकों में खेल के मामले में अग्रणी रहा जिला अब पिछड़ चुका है।

कई स्टेडियम तो गुमनामी में हैं। पीस पार्टी के जिलाध्यक्ष अब्दुल मुईद बाबा ने कहा कि ईमानदारी के साथ सांसद को काम करना चाहिए। जनता के बीच रहना चाहिए। शहर का विकास कराना उसकी पहली प्राथिमकता होनी चाहिए।

आखिर जनता उसे चुनती है तो जनता के बारे में सोचना उसका पहला कर्तव्य है। चुनाव तो बार बार होते हैं फिर इस बार क्या नया सोचें ये प्रश्न सामने आते ही पीस पार्टी के प्रदेश सचिव मोहम्मद वसीमुददीन अंसारी ने कहा कि वोटर जागरूक हो तभी बदलाव आएगा।

देश को बचाना है तो देश के विकास के बारे में सोचने वाला सांसद इस बार बनना चाहिए। राइट टू रिजेक्ट का भी प्रयोग करें। उद्योगपति अशोक मीतल ने कहा कि उद्योग जगत के बारे में कोई जनप्रतिनिधि नहीं सोच रहा, वरना अब तक व्याप्त समस्याएं हल हो जातीं। जबकि एक बड़ा हिस्सा इसी उद्योग के सहारे चल रहा है।

नए सांसद से क्या उम्मीदें हैं के सवाल पर एआईसीसी कांग्रेस के सदस्य अतुल चतुर्वेदी बोले, हाल ही में जसराना में एक दुर्घटना में पांच लोगों की मौत को कम किया जा सकता था, अगर उपचार समय पर मिल जाता।

जब जिले में सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक ही नहीं मिलेंगे तो उम्मीदें कैसी। जिले में क्या बदहाल है और क्या जरूरत है, इसके बारे में सोचना जनप्रतिनिधि का काम है। उद्योगपित देवीचरण अग्रवाल ने कहा कि नए सांसद से काफी उम्मीदें हैं।

बदलाव के बीच एक युवा वर्ग को सबसे ज्यादा वोटिंग का अधिकार मिला है, क्योंकि उनकी संख्या काफी है। ऐसे में युवाओं को काफी सोच समझकर वोट डालना होगा। क्या बदलाव आया और क्या सपने साकार हुए के सवाल पर इस्लामिया इंटर कालेज के प्रवक्ता आदम मुस्तफा ने कहा कि बदलाव की सोच तब देखी जा सकती है जब सांसद यहीं रहकर लोगों की जरूरतों को समझे।

जब उसे सोचने-समझने की परख नहीं होगी तो विकास से काम नहीं चल सकता। नाली व सड़कें बना दीं, लेकिन पानी निकासी नहीं हुई तो सब बेकार हो जाएगा। धर्मसिंह एडवोकेट ने कहा कि संसाधनों की कमी के बीच हर समस्या पर गहराई से सोचने वाला सांसद चाहिए। बिजली, पानी, सड़क ये मूलभूत समस्याएं हल हों और अन्य समस्याओं पर भी जागरूक हो।

सपा के प्रदेश सचिव साहिबे आलम अंसारी ने कहा कि सोच में बदलाव की जरूरत है, तभी देश और समाज तरक्की कर सकेगा।

सुरेंद्र सिंह एडवोकेट ने कहा कि टिकाऊ सांसद की जरूरत है जो जनभावनाओं को समझे न कि उनके साथ खेले। श्रमिक नेता भूरी सिंह यादव ने कहा कि श्रमिकों की समस्याओं को प्रमुखता से हल कराने की चाहत उसके अंदर झलकनी चाहिए। उसकी परख भी अच्छी हो।

प्रधानाचार्य पवन शर्मा ने कहा कि बदलाव प्रकृति का नियम है। ऐसे में सिस्टम को सुधारने के लिए सांसद बेहतर होना जरूरी है। वोट की कीमत हम सबको पहचाननी होगी। समाजसेवी इजहार खान ने कहा कि एक-एक वोट का महत्व जब नेताओं की समझ में आने लगेगा तो बदलाव स्वत: होना शुरू हो जाएगा।

ये प्रमुख बिंदु चर्चा में सामने आए -प्रत्याशी स्वच्छ छवि, अच्छे विचार और प्रखर व्यक्तित्व का हो। -विकास, मूलभूत सुविधाओं की ओर ध्यान देने वाला हो। -कांच उद्योग में मजदूरों की समस्याओं की ओर भी ध्यान दे। -प्रत्याशी ऐसा हो जो स्थानीय हो और समस्याएं रोजाना सुने। -प्रत्याशी चुनने से पहले अच्छी तरह से सोच विचार जरूरी। -पार्टियां भी अपने प्रत्याशी उतारने से पहले छवि देखें। -एक वोट की कीमत भी प्रत्याशी और वोटर दोनों समझों। -जब हम बदलाव अपने अंदर लाएंगे तो समाज, देश बदलेगा।

-खेलों के प्रति भी सांसद का रुझान होना बेहद जरूरी है। -दूषित वातावरण से दूर हो और शहर के कार्यक्रमों में आए। -हैलो हाय, ग्लैमर दिखाने वाला प्रत्याशी इस बार नहीं चाहिए। -प्रत्याशी ऐसा होना चाहिए जो पाला बदलने वाला नहीं हो। -केवल उद्योगपितयों का ही बनकर नहीं रह जाए सांसद। -सांसद खयाल रखे कि उसे आम जनता ने चुना है, दर्द समझे। -महिलाओं को इस बार स्वतंत्र होकर वोट डालना होगा। -महिला प्रत्याशियों को भी पार्टियों की खड़ा करने में रुचि हो। -जिले की समस्याओं से भली-भांति परिचित हो प्रत्याशी।

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