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डॉक्टरों की हड़ताल से इलाज को भटके मरीज

फरुखाबाद। कानपुर में डॉक्टरों के साथ हुई कार्रवाई से नाराज आईएमए के आवाहन पर यहां निजी अस्पतालों में डॉक्टर हड़ताल पर रहे। न तो ओपीडी लगी और न ही इमरजेंसी में मरीज देखे गए। ऐसे में दूर दराज से आए मरीज भटकते रहे। कोई पुराने पर्चे की दवाई लेकर चला गया तो कोई डॅक्टर के आने का इंतजार करता रहा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के सचवि डॉक्टर विपुल अग्रवाल ने बताया कि यहां 40 से 50 के बीच में निजी अस्पताल हैं।

सभी डॉक्टरों ने कानपुर की घटना को लेकर ओपीडी और इमरजेंसी में मरीजों को नहीं देखा। अस्पतालों में किसी तरह का कामकाज नहीं हुआ है। वहीं दूसरी ओर अस्पतालों के बाहर मरीजों की भीड़ रही। डॉक्टरों ने कानपुर की घटना का हवाला देकर मरीजों को तसल्ली बंधाई। जो मरीज भर्ती थे उन पर तो नजर रखी गई। इसके अलावा रविवार को निजी अस्पतालों में मरीज देखने की कोई पहल नहीं की गई जबकि इलाज कराने के लिए दूर दराज से लोग भी यहां पहुंचे।

डॉक्टर के दवा न देने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। काफी देर तक मरीज अस्पतालों के बाहर तक इस इंतजार में बैठे रहे कि हो सकता है कि डॉक्टरों का विरोध खत्म हो जाए और वो मरीजों को देख लें। रविवार को डॉक्टरों की हड़ताल से चलते पांच हजार से अधिक लोग जो इलाज के लिए विभिन्न अस्पतालों में पहुंचे वह बगैर दवा लिए वापस हुए। फोटो संख्या 2 एफकेडी 2कायमगंज के पटवन गली निवासी सौरभ की पत्नी बुखार से परेशान थी।

वह सिटी अस्पताल में इलाज के लिए आए थे लेकिन यहां हड़ताल के चलते उन्हें दवाई नहीं मिली। इससे वह मजबूर होकर बैरंग लौट गए। बोले कि हड़ताल के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बादमें इन्होंने मेडिकल से दवा ले ली।

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