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जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से हालात बेकाबू

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता। ..दिल की गंभीर बीमारी से पीड़ित गोण्डा निवासी अनीता को लेकर बुजुर्ग पिता लाल बहादुर तिवारी ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। एम्बुलेंस से उतरते ही वह स्ट्रेचर की तरफ भागे। इसी दौरान एक सुरक्षाकर्मी ने उन्हें हड़ताल की खबर दी। यह सुनते ही गम और गुस्सा आंसू बनकर उनकी आंखों से बहने लगे।

वह फफक कर रो पड़े। सुरक्षाकर्मियों से बेटी को बचाने की गुहार लगाने लगे। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सीने से लगाकर ढांढस बंधवाया। उन्हें बलरामपुर व दूसरे प्राइवेट अस्पताल में ले जाने की सलाह दी। इस दौरान एम्बुलेंस चली गई।

मजबूरन वह ऑटो से मरीज को लेकर प्राइवेट अस्पताल पहुंचे। करीब 200 से ज्यादा मरीजों को ट्रॉमा सेंटर से बिना इलाज लौटा दिया गया। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का दूसरा दिन मरीजों पर कहर बनकर टूटा। सुबह से ही अराजक स्थिति बन रही।

गंभीर मरीजों को भी ट्रॉमा सेंटर में इलाज नहीं मिला। रोते-बिलखते तीमारदार ट्रॉमा की चौखट से लौट गए। अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। तीमारदार मरीजों के गंभीर होने की दुहाई देते रहे। डॉक्टरों के सामने फरियाद करते रहे, लेकिन वे नहीं पसीजे।

हालात यह थे शाम सात बजे तक केवल आठ मरीजों को ही भर्ती किया गया। इसी प्रकार लखीमपुर खीरी निवासी सुमन मौर्या को भी लौटा दिया गया। खून की उल्टियां कर रहे आमित को प्राथमिक इलाज तक मुहैया नहीं कराया गया।

गोरखपुर के आनंद लोक हॉस्पिटल से रेफर बृजेश के परिवारीजन भी भटकते रहे। दर्द से कराहते बृजेश प्राइवेट हॉस्पिटल पहुंच गए। ट्रॉमा छोड़ भागे मरीजनए मरीजों की भर्ती पहले से ठप थी।

वहीं पहले से ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मरीजों को जब घंटों इलाज नहीं मिला तो तीमारदार मरीजों को लेकर जाने लगे। हालात यह हो गए कि हर वक्त भरे रहने वाले ट्रॉमा सेंटर के वार्डो में सन्नाटा पसरा रहा। करीब 350 बेड वाले ट्रॉमा सेंटर में 200 से ज्यादा बेड खाली हो गए।

ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी ओपीडी के सभी बेड खाली थे। मेडिसिन, जनरल सर्जरी समेत अन्य विभागों में एक भी मरीज भर्ती नहीं था। गांधी वार्ड में भी मरीज का पलायन शुरू हो गया।

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