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शहीद बिटिया के परिवार की प्रशासन ने नहीं ली सुध

मलिहाबाद। आनन्द अवस्थी। मौसमी की वीरता ने गांव, ब्लॉक और राजधानी का मान बढ़ाया लेकिन इस बहादुर बिटिया की शहादत को प्रशासनिक अधिकारियों ने कुछ ही दिन में भुला दिया। प्रशासनिक स्तर पर मौसमी के बदहाल परिवार के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। लिहाजा परेशान परिवारीजनों ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर आवास व आर्थिक मदद की गुहार की है। माल ब्लॉक में टिकरी कलां गांव की मौसमी ने एक मई 2013 को सहेली केशकली और सोनिया को नदी में डूबने से बचाया था।

दोनों को बचाने में ही मौसमी नदी के भंवर में समा गई थी। 26 जनवरी 2014 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मौसमी को मरणोपरांत वीरता पुरस्कार से नवाजा था। चार फरवरी 2014 को ‘हिन्दुस्तान’ ने मौसमी के परिवार की बदहाली के सम्बंध में खबर प्रकाशित की थी।

इसे पढ़कर रिटायर बैंक अधिकारी राजीव कपूर ने परिवार की आर्थिक मदद के साथ ही बेटियों के ब्याह में भी मदद का भरोसा दिया था। आम लोगों की संवेदना भले की जागी हो लेकिन परिवार की मदद के लिए अभी तक ब्लॉक, तहसील या जिलास्तर के प्रशासनिक अधिकारी ने कोई पहल नहीं की।

मौसमी की मां बुधाना ने 24 फ रवरी को प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर पुरस्कार के लिए धन्यवाद दिया और आवास व आर्थिक मदद के लिए गुहार की। उन्होंने बताया कि बीपीएल पात्रता सूची में नाम होने और एसडीएम मलिहाबाद के आश्वासन देने के बाद भी कार्रवाई नहीं की जा रही है। रामस्वरूपके छह सदस्यीय परिवार में पत्नी बुधाना, बेटे मनोज, विनोद व बेटी रीता और वमिला हैं। रामस्वरूप मजदूर है। आर्थिक हालात ठीक न होने के कारण बेटियों को पढ़ाई छोड़नी पड़ी।

आगे पढ़ाई करने की आस जगी ‘हिन्दुस्तान’ में मौसमी के परिवार की बदहाली की खबर पढ़कर राजस्थान स्थित सरस्वती वानस्थली विद्यापीठ की प्रधानाचार्या लीना मुखर्जी ने 10 फ रवरी को पत्र भेजकर वीरता के लिए बधाई दी।

प्रधानाचार्या ने रीता और वमिला के साथ पूरे परिवार को निमंत्रण भेजा है। साथ ही दोनों के लिए विद्यालय के प्रवेश फोर्म भी भेजे हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वह निशुल्क पढ़ेंगी या नहीं। फिलहाल पूरा परिवार राजस्थान जाने की तैयारी कर रहा है।

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