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विधान भवन व सचिवालय पर करोड़ो का टैक्स बकाया

लखनऊ। वरिष्ठ संवाददाता। विधान भवन हो या सचिवालय। मुख्यमंत्री कार्यालय हो या फिर एसएसपी आफिस। हजरतगंज कोतवाली हो या फिर माननीयों के लिए बना वीवीआईपी गेस्ट हाउस। राजधानी में सरकारी महकमों पर नगर निगम का अरबों रुपए टैक्स बकाया है। जवाहर भवन व लोक निर्माण विभाग जैसे बड़े् महकमे भी नगर निगम के बकाएदार हैं। ये खुद टैक्स चुका रहे हैं न निगम इनसे वसूल पा रहा है।

निगम का खजाना खाली है। वह इसे भरने के लिए गरीबों की गर्दन मरोड़ रहा है। छोटे-छोटे बकाएदारों की सम्पत्तियां कुर्क करने के लिए नोटिस जारी है। दुकानदारों व व्यापारियों के संस्थान सील कराने की कार्रवाई शुरू हो गई है। पर इन विभागों पर नगर निगम मेहरबान है।

शहर में बनी बिल्डिंग से नगर निगम गृहकर वसूलता है। आवासीय मकानों से आवासीय गृहकर व बाकी दुकानों व कार्यालयों से अनवासीय टैक्स वसूलता है। राजधानी में बड़े् व छोटे बकाएदारों के खिलाफ निगम ने उत्पीड़नात्मक कार्रवाई शुरू कर दी लेकिन बड़े् बकाएदार व सरकारी महकमों पर निगम सख्ती ही नहीं कर रहा है।

पहले जहां सरकारी विभागों के बकायों पर नगर निगम बकाएदार विभागों के अफसरों की गाडिम्यां उठवाकर कब्जे में ले लेते थे। सम्बंधित विभागों के बैंक खाते सीज कराता था वहीं इस बार यह कार्रवाई नहीं हो रही है।

महात्मागांधी मार्ग स्थित रेलवे की एक बिल्डिंग पर 8.06 करोड़ व दूसरी पर 5.35 करोड़ रुपए टैक्स बकाया है। जवाहर भवन पर 2.29 करोड़ तथा जनपदथ सचविवालय 1.57 करोड़ रुए टैक्स बकाया है। बापू भवन सचिवालय पर पहले से ही लगभग 26 लाख रुपए का बकाया चला आ रहा है।

इस वित्तीय वर्ष का टैक्स जोड़ने उस पर कुल 1.33 करोड़ रुपए टैक्स हो गया है। विधान भवन पर अभी 83 लाख से ज्यादा का टैक्स बाकी है। सरकारी महकमों व अन्य बड़े् बकाएदारों पर नगर निगम की मेहरबानी काफी ज्यादा है।

इन विभागों के खिलाफ निगम कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। अगर निगम इनसे टैक्स वसूल ले तो उनका गृहकर का लक्ष्य पूरा हो जाएगा।

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