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फर्जी आरटीआई के चक्कर में फंसे विभाग और ‘आवेदक’

देहरादून। मुख्य संवाददाता। सिंचाई विभाग में आरटीआई का इस्तेमाल दूसरे व्यक्ति के नाम से करने का मामला सामने आया है। सूचनाएं कुछ ऐसी मांगी गईं कि विभाग तो परेशान है ही, जिनके नाम से सूचनाएं मांगी गई हैं वे भी परेशान है। विभाग अब ‘आवेदक’ को आरटीआई फीस जमा करने का नोटिस भेज रहा है।

साहित्यकार मुकेश नौटियाल, भारतीय जीवन बीमा निगम में कार्यरत हैं। लिखने पढ़ने से गहरा नाता है लेकिन आरटीआई को हथियार बनाने की कभी नौबत नहीं आई। बीते एक महीने से वे उनके घर पर आने वाले नोटिस से परेशान हैं।

इसमें यमुना कॉलोनी स्थित सिंचाई विभाग के परियोजना खंड कार्यालय से उन्हें, मांगी गई सूचनाओं के बदले फीस जमा करने को कहा जा रहा है। पहले उन्होंने नोटिस को पोस्ट ऑफिस की चूक माना लेकिन बाद में विभाग के अपीलीय अधिकारी से उन्हें पेशी पर हाजिर होने के लिए बुला लिया गया।

चूंकि उन्होंने खुद कोई आरटीआई नहीं लगाई थी, इसलिए उन्होंने सच जानने के लिए आरटीआई के जरिए ही कथित तौर पर उनके द्वारा मांगी गई सूचना की प्रति मांगी। उक्त प्रति अब उन्हें मिल गई है।

सिंचाई विभाग में वर्ष 2005 से नवंबर 2013 तक हुए निर्माण कार्यों का वविरण, इनके टेंडर जारी करने वाले अधिकारियों का नाम, घर का पता और अधिशासी अभियंता से लेकर एकाउंटेंट तक की इनकम रिटर्न की जानकारी मांगी गई है। इस सूचना के एवज में ही विभाग ने नौटियाल से करीब आठ सौ रुपए की फीस मांगी थी।

नौटियाल ने अब विभाग को बता दिया है कि उन्होंने ऐसी कोई सूचना नहीं मांगी है। उन्होंने बताया कि आवेदक ने अपने पता में उनके मकान का नाम ‘नारायण विला’ भी लिखा है, इससे जाहिर है कि किसी ने उनके नाम का फर्जी इस्तेमाल किया है।

नौटियाल ने मामला सूचना अयोग की जानकारी में डाल दिया है, नौटियाल का कहना है कि आरटीआई जैसे हथियार के गलत इस्तेमाल से इसकी धार कुंद होगी, ऐसी हरकतों पर सख्ती जरूरी है।

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