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दुकान की सील तोड़ने के एवज में मांगी रिश्वत

नई दिल्ली वरिष्ठ संवाददाता। दिल्ली नगर निगम ने पहाड़गंज इलाके में एक दुकान को सील किया। सील बंदी के बाद दुकानदार से कई लोगों ने सील तुड़वाने के लिए संपर्क किया। दुकानदार को बताया गया कि जिन लोगों ने सील लगाई है वहीं सील तोड़ देंगे। लेकिन इसके एवज में उसे तीन लाख रुपये बतौर रिश्वत देने होंगे। इसकी शिकायत दुकानदार ने सीबीआई को कर दी। सीबीआई ने इलाके के तहसीलदार समेत दो लोंगों को रिश्वत की मांग करने के आरोप में गिरफ्तार किया।

अदालत ने इस मामले में तहसीलदार एवं उसके लिए दलाली करने वाले व्यक्ति को तीन साल कैद की सजा सुनाई है। पटियाला हाउस स्थित सीबीआई स्पेशल जज पूनम ए बाम्बा की अदालत ने घूसखोर तहसीलदार संजय कुमार शर्मा एवं दलाल रविन्द्र कुमार को आपराधिक साजशि एवं भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 8 के तहत दोषी करार दिया है।

अदालत ने दोषी अधिकारी एवं दलाल पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि सब डिवीजन मजिस्ट्रेट (एसडीएम) कार्यालय में तहसीलदार एक महत्वपूर्ण पद होता है।

तहसीलदार के कंधों पर कानून का पालन कराने की अहम जिम्मेदारी होती है। लेकिन यहां इस मामले में आरोपी तहसीलदार ने न केवल कानून तोड़ा है, बल्कि लोगों के वशि्वास को भी ठेस पहुंचाई है। ऐसे अधिकारी को सश्रम कैद की सजा ही सुनाई जानी चाहिए।

दलाल ने खुद किया शिकायतकर्ता से संपर्क सीबीआई के मुताबिक पहाड़गंज स्थित एसडीएम कार्यालय में कार्यरत तहसीलदार संजय कुमार शर्मा की तरफ से बिचौलिए रविन्द्र कुमार ने शिकायतकर्ता अशोक कुमार पुरी से संपर्क किया। रविन्द्र ने पुरी से कहा कि उनकी दुकान जो कि 20 दसिंबर 2010 को एमसीडी ने सील कर दी थी उसकी सील तुड़वाने का वह इंतजाम कर सकता है।

इसके एवज में तीन लाख रुपये की मांग की गई। रविन्द्र ने पुरी को बताया कि पहाड़गंज के तहसीलदार यह काम कराएंगे। सौदा सवा दो लाख रुपये में तय हो गया। अग्रिम रकम के तौर पर एक लाख रुपये मांगे गए। इस बाबत अशोक पुरी ने सीबीआई को शिकायत कर दी थी। 19 सितंबर 2011 को सीबीआई ने तहसीलदार व दलाल को गिरफ्तार किया था। टेलिफोनिक बातचीत से आरोप हुए साबितइस पूरे मामले में बिचौलिए, शिकायतकर्ता एवं तहसीलदार के बीच हुई टेलिफोनिक बातचीत अहम साक्ष्य साबित हुई।

फोरेंसिक जांच में इस बातचीज की रिकार्डिग सही पाई गई। दरअसल इस पूरे मामले में रशि्वत की रकम की मांग से लेकर सौदा तय होने एवं रशि्वत की राशि तहसीलदार तक पहुंचाने को लेकर टेलिफोन पर ही बातचीत हुई थी और यह सारी बात शिकायतकर्ता ने अपने फोन पर रिकार्ड कर ली थी। अदालत ने टेलिफोनिक बातचीत को महत्वपूर्ण सबूत के तौर पर स्वीकार करते हुए तहसीलदार व बिचौलिए को दोषी करार दिया है।

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