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हिचकोले खाने लगी सरकार की कागज बचाने की मुहिम

नई दिल्ली निर्मल यादव। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की सरकारी कामकाज में कागजों के इस्तेमाल को न्यूनतम करने की महत्वाकांक्षी योजना एक बार फिर हिचकोले खाने लगी है। पर्यावरण विभाग का प्रभार संभाल रहीं शीला दीक्षित की पहल पर कागजमुक्त प्रशासन की अवधारणा को मूर्तरूप देने के लिए गत वर्ष जून में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सरकारी समाचारों की हर दिन बनने वाली न्यूजक्लिप फाइल की ई-कॉपी बनानी थी।

प्रोजेक्ट की फाइल छह महीने तक तमाम विभागों में भटकने के बाद गत जनवरी में गठित केजरीवाल सरकार द्वारा इसे बतौर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया। लगभग 500 पेड़ सालाना बचाने की यह मुहिम रंग ला पाती, इससे पहले ही महज 25 दिनों में इस कारगर शुरुआत पर अधिकारी तंत्र का फिर से ग्रहण लगता नजर आ रहा है। न सिर्फ मानव संसाधन बल्कि समय, पसा, पर्यावरण और कागज बचाने वाली यह पहल पर्यावरण सचवि संजीव कुमार की देखरेख में गत एक फरवरी को शुरू हुई थी।

इसके तहत उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और सभी मंत्रियों सहित चुनिंदा विभाग अध्यक्षों को न्यूजक्लिप की सॉफ्ट कॉपी ईमेल के जरिए दी जाने लगी। इस बीच 14 फरवरी को सरकार गिरने के बाद वित्त विभाग ने इस काम को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने से पूर्व वित्तीय एवं अन्य समस्याओं के समाधान से जुड़े सवाल पर्यावरण विभाग से पूछे।

पिछले 25 दिनों में पायलट प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणाम मिलने के बावजूद अफसरों की नुक्ताचीनी से आजिज आकर परियोजना चला रही टीम ने गत 28 फरवरी से ई न्यूज क्लिप फाइल बनानी बंद कर दी है।

परियोजना के तहत न्यूज क्लिप के अलावा विभागीय पत्राचार और विधानसभा में सदन पटल पर पेश होने वाले दस्तावेजों को भी सॉफ्ट कॉपी के रूप में तब्दील करने का लक्ष्य है।

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