DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

नई राजनीति और राजनेता

वर्तमान में राजनीति बहुत तेजी से बदल रही है। राजनीति में अब पेशेवर लोग भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं, जो कभी इसमें आना नहीं चाहते थे। राजनीति के तौर-तरीके भी बदल गए हैं। 2014 का लोकसभा चुनाव इस मामले में भी दिलचस्प है कि इस बार भारतीय राजनीति में तमाम नए तरह के प्रयोग देखने को मिल रहे हैं।

नई तरह की राजनीति के कुछ प्रयोग
प्राइमरीज (उम्मीदवार चुनने का तरीका)

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव की तर्ज पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने निर्णय लिया है कि देश में 16 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने से पहले उनका पार्टी के अंदर ही चुनाव होगा। इन चुनावों में जो उम्मीदवार विजयी होगा, उसे ही लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का टिकट मिलेगा। राहुल का कहना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में हर चुनाव में इसी तरह टिकटों का वितरण किया जाएगा। यह अपनी तरह का देश में पहला प्रयोग होगा। 

चुनावी चंदा ट्रांसपैरेंसी
आम आदमी पार्टी ने चंदे की पारदर्शिता को अहम हथियार के तौर पर पेश किया है। पार्टी चंदे में मिले हर रुपये का हिसाब अपनी वेबसाइट पर अपडेट कर देती है। आम आदमी पार्टी किसी भी तरह का ढका-छिपा चंदा नहीं लेती है, जबकि दूसरी ओर, कांग्रेस और भाजपा जैसी बड़ी राजनीतिक पार्टियां अभी तक खुद को मिले चंदे का स्रोत जनता को नहीं बताती हैं।

चाय पे चर्चा
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने देश में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने के लिए ‘चाय पे चर्चा’ नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत भाजपा कार्यकर्ता देश के लगभग 300 शहरों की 1000 चाय दुकानों पर लोगों को चाय पिलाएंगे और राजनीति पर चर्चा करेंगे। इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि कोई भी नेता एक साथ एक हजार चाय की दुकान पर बैठे लोगों से चर्चा कर सकता है। पहली चर्चा फरवरी में हो चुकी है। मोदी का यह कार्यक्रम अभी चल रहा है। 

‘आउटरीच’ कार्यक्रम
कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी विभिन्न वर्गों के लोगों तक पहूंच बनाने के लिए ‘आउटरीच’ कार्यक्रम का सहारा ले रहे हैं। इसके तहत वे किसी खास वर्ग के एक समूह से सीधे बात करते हैं और अगले लोकसभा चुनाव के लिए उनसे सुझाव मांगते हैं। अब तक वह अपने इस कार्यक्रम के तहत आदिवासी महिलाओं, किसानों, पूर्व सैनिकों, रेहड़ी-पटरी वालों, रिक्शे वालों आदि से मिल चुके हैं। कांग्रेस हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहले ही यह प्रयोग कर चुकी है।

घोषणापत्र पर जनता से सुझाव
देश की राजनीतिक पार्टियां अपनी राजनीति को समय के साथ बदल रही हैं। इसी बदलाव के अंतर्गत कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी अधिक से अधिक लोगों से जुड़ने की मंशा से अपने घोषणापत्र के लिए ऑनलाइन सुझाव मांग रही हैं। भाजपा और कांग्रेस ने लोगों के सुझाव मांगने के लिए विशेष वेबसाइट भी तैयार करवाई है।

नए राजनेता
कुछ समय पहले तक कामयाब लोग राजनीति में नहीं आना चाहते थे, लेकिन अब बदलाव की बयार चल रही है। इन दिनों गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के लोग, पत्रकार, बड़ी कंपनियों से जुड़े लोग, पूर्व नौकरशाह, आईआईएम-आईआईटी से पढ़े-लिखे पेशेवर, खिलाड़ी, वकील, बॉलीवुड हस्तियां, कला क्षेत्र के बड़े नाम, सेना में रहे लोग राजनीतिक दलों से जुड़ते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आता जाएगा, इसमें और तेजी आएगी। हाल ही में पूर्व थलसेनाध्यक्ष वी.के. सिंह, टीवी पत्रकार आशुतोष, मुंबई के पूर्व कमिश्नर सत्यपाल सिंह, डेक्कन एयर के गोपीनाथ, नृत्यांगना मल्लिका साराभाई, समाजसेवी मेधा पाटकर, आरबीएस की पूर्व चेयरपर्सन मीरा सान्याल, एनडीटीवी के पूर्व सीईओ समीर नायर, इंफोसिस के वी. बालाकृष्णन, संगीतकार बप्पी लाहिड़ी आदि प्रमुख हैं।

नई जमात के कुछ नेता
अरविंद केजरीवाल 

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 1989 में आईआईटी खड़गपुर से मेकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली थी। इसके बाद उन्होंने भारतीय राजस्व सेवा में भी काम किया। 2006 में केजरीवाल को सूचना अधिकार कानून पर काम करने के लिए मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

वी.के. सिंह
पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल वी.के. सिंह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। पूरी संभावना है कि वह पार्टी के लिए लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। सक्रिय राजनीति में आने से पहले जनरल सिंह अन्ना हजारे के अनशन में साथ रहे थे।

मनीष सिसौदिया
दिल्ली के पूर्व शिक्षा और शहरी विकास मंत्री मनीष सिसौदिया पत्रकार रहे हैं। उन्होंने जम्मू से मेकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री भी ली है। वह आम आदमी पार्टी के पटपड़गंज से विधायक हैं।

सत्यपाल सिंह
मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर सत्यपाल सिंह पुलिस की नौकरी छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में जन्मे सत्यपाल पश्चिमी यूपी की किसी लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार हो सकते हैं।

आशुतोष
दिल्ली में आम आदमी पार्टी के अच्छे प्रदर्शन के बाद टीवी पत्रकार आशुतोष ने भी इस पार्टी का दामन थाम लिया। आशुतोष आईबीएन-7 के प्रबंध संपादक के रूप में कार्यरत थे।

आर.के. सिंह 
राजकुमार सिंह बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव रहे आर.के. सिंह ने दिसंबर में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा। सिंह पहली बार 1990 में चर्चा में आए थे, जब उन्होंने लाल कृष्ण आडवाणी की राम रथ यात्रा को रोक कर उन्हें गिरफ्तार करने का साहस दिखाया था।

नंदन निलेकणि
आईआईटी, मुंबई से पढ़े नंदन निलेकणि फिलहाल भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के चेयरमैन हैं। वह आईटी कंपनी इंफोसिस के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। वह 2002 से 2007 तक कंपनी के सीईओ रहे हैं। माना जा रहा है कि वह बेंग्लुरु से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।

सोमनाथ भारती
आम आदमी पार्टी के मालवीय नगर से विधायक सोमनाथ भारती ने आईआईटी, दिल्ली से एमएससी किया है। आईआईटी दिल्ली उनके विधानसभा क्षेत्र में ही आता है। भारती केजरीवाल सरकार में दिल्ली के कानून और पर्यटन मंत्री थे।

सौरभ भारद्वाज
दिल्ली के पूर्व परिवहन, खाद्य व आपूर्ति मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में बी. टेक. किया है। भारद्वाज ग्रेटर कैलाश से आम आदमी पार्टी के विधायक हैं।

बप्पी लाहिड़ी
बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार बप्पी लाहिड़ी भारतीय जनता पार्टी से हाल ही में जुड़े हैं। भाजपा उन्हें कोलकाता से लोकसभा टिकट देने का मन बना रही है। बप्पी का कहना है कि वह समाजसेवा करना चाहते हैं और समाजसेवा के लिए राजनीति से अच्छा कोई और रास्ता नहीं हो सकता।

वी. बालाकृष्णन
बीस साल से अधिक समय तक इंफोसिस के साथ रहे वी. बालाकृष्णन आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए हैं। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से बी.एससी. किया है।

मेधा पाटकर
प्रसिद्ध समाज सेविका मेधा पाटकर भी सक्रिय राजनीति से जुड़ गई हैं। उन्होंने आम आदमी पार्टी का दामन थामा है। उन्हें नर्मदा घाटी की आवाज के रूप में पूरी दुनिया में जाना जाता है। वैसे सार्वजनिक जीवन में मेधा पाटकर गांधीवादी विचारधारा के काफी करीब हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:नई राजनीति और राजनेता