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मन की कसरत

मेडिकल साइंस के अनुसार, यदि हम नियमित रूप से अपनी मांसपेशियों को व्यायाम से चुस्त नहीं रखते हैं, तो उन्हें खो देते हैं। इसीलिए मनुष्य या जानवर, सभी कोई न कोई शारीरिक व्यायाम अवश्य करते ही हैं। पर नियम हमारे शरीर पर लागू होते हैं, वहीं हमारे मन भी लागू होते हैं। शरीर की ही तरह प्रतिदिन हमारे मन को भी व्यायाम की जरूरत पड़ती है। जब हम बार-बार हमारे आसपास होने वाली घटनाओं से विचलित होते रहते हैं, तब हम अपने मन पर नियंत्रण खो बैठते हैं और फिर यह शिकायत करते हैं कि ‘क्यों हमारा मन हमको पागल बनाने पर तुला है?’ हम भूल जाते हैं कि ‘उदास मन, वास्तव में एक लकवाग्रस्त मन होता है।’ इसलिए शरीर के साथ-साथ हमें अपने मन का भी व्यायाम अवश्य करना चाहिए।

आज तक जिसने भी सफलता हासिल की है, वह अपने स्थिर और शांत मन की बदौलत हासिल की है। नियति के भरोसे जीने के बदले उन्होंने अपने मन की शक्ति के आधार पर जो चाहा, वह हासिल करके दिखाया। हमें सबसे पहले अपने मन को सकारात्मक प्रशिक्षण देकर स्वाभाविक रूप से उसे शक्तिशाली बनाना होगा और फिर ध्यान (मेडिटेशन) के नियमित व्यायाम से खुद को निर्भीक, साहसी और सशक्त बनाना होगा। पर, इन सभी गुणों को हमें अपने आत्मसात करने की जरूरत हैं, क्योंकि इन्हें किसी और के द्वारा प्राप्त किया नहीं जा सकता है। जब हम नियमित रूप से ‘माइंड जिम’ या मन के व्यायाम की इस प्रक्रिया का आरंभ करते हैं, तब हमारा मन सशक्त हो जाता है और हमें स्मृति सुधार, बुद्धि की बढ़त, मन की शांति, स्वीकार्यता का गुण, जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण, सहज ज्ञान युक्त शक्ति जैसे लाभ प्राप्त होते हैं, जो हमारी आंतरिक शक्ति और मन की शक्ति को वास्तविक रूप से अभिव्यक्त करते हैं। तो किस बात का इंतजार कर रहे हैं आप? चलिए आज से ही मन की कसरत शुरू कर दीजिए।

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  • Web Title:मन की कसरत