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विश्व युद्ध का इंतजार

अमेरिका की जेब में न जाने कितनी चेतावनियां हैं, जिन्हें वह दुनिया भर में बांटता घूमता है, लेकिन उसकी चेतावनी खत्म ही नहीं होती। अब उसने यूक्रेन में चल रहे घटनाक्रमों के चलते चेतावनी की एक चिट रूस को पकड़ा दी है। देखने वालों को अमेरिका और रूस के प्यार को देखकर यही लगता है कि दुनिया बनाते समय अगर ये होते, तो बनाने वाले ने दुनिया को आधा-आधा इन दोनों में बराबर बांट दिया होता। मगर दुनिया का दुर्भाग्य कि इनसे पहले कई पैदा हो गए। रूस की लंबे समय से इच्छा रही है कि वह अमेरिका बने, लेकिन अमेरिका बनना इतना आसान तो नहीं है। यह एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है।

बहरहाल, रूस में जब से पुतिन का शासन हुआ है, रूस की अमेरिका बनने की हसरतें फिर से जवां हो गई हैं। रूस को दर्द होता है कि मेरे हिस्से का लड्डू भी अमेरिका के हाथों में क्यों है, उधर अमेरिका का दर्द है कि माना मैं कोलंबस का पहली च्वॉइस नहीं था, लेकिन लड्डू खाने के मामले में ब्रिटेन, फ्रांस, पुर्तगाल से ऐतिहासिक रूप से पिट चुके लड्डू-आकांक्षी देशों से वह बेहतर दावेदार है। रूस से तो जाहिर तौर पर बेहतर है।..कुछ पिटे हुए मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि छोटे-छोटे युद्धों से ऊब चुकी दुनिया तीसरे विश्व युद्ध का इंतजार कर रही है। ऐसे लोगों की इच्छा है कि तीसरा विश्व युद्ध हो ही जाए और इस बार पहले और दूसरे विश्व युद्ध जैसा फ्लॉप शो न हो, जिसमें नाम तो हो विश्व युद्ध का और लड़े सिर्फ आठ-दस बड़े देश!
बना रहे बनारस में रंगनाथ सिंह

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