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केजी-डी6 में नुकसान की मात्रा तय करे कैग: पेट्रोलियम मंत्रालय

केजी-डी6 में नुकसान की मात्रा तय करे कैग: पेट्रोलियम मंत्रालय

पेट्रोलियम मंत्रालय ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से कहा है कि वह केजी-डी6 में तेल-गैस परियोजना के विकास विकास के लिए रिलायंस इंडस्टीज द्वारा केवल एक बोली के आधार पर दिए गए ठेकों से भारत सरकार को हुई राजस्व हानि का आकलन तय करे।

मंत्रालय का कहना है कि सरकार को इसमें यदि किसी भी तरह का नुकसान हुआ है तो केजी-डी6 ब्लाक में तेल एवं गैस क्षेत्रों के विकास के लिए स्वीकृत पूंजीगत लागत में से काट लिया जाएगा। कैग ने सितंबर 2011 में केजी डी6 ब्लाक पर आरआईएल के खर्च की आडिट संबंधी अपनी रपट में मंत्रालय से कहा था कि वह 10 विशेष अनुबंधों की सावधानी से समीक्षा करे।

इन 10 अनुबंधों में से आठ तो एकर ग्रुप कंपनी को दिए गए जबकि बाकी बोलीदाताओं को तकनीकी आधार पर अपात्र घोषित कर दिया गया। कैग ने 2006-07 और 2007-08 की अवधि के 2.6 अरब डॉलर के खर्चों की जो आडिट की थी उसमें खरीद के इन 10 अनुबंधों का कुल मूल्य 2.4 अरब डॉलर का था। मंत्रालय ने इस बारे में कैग को लिखा है कि इस मामले में आडिट को पूरा करते हुए इसके वित्तीय प्रभाव को भी बताया जाए।

उसके अनुसार  आडिट करने वाले आडिटर इस मामले में निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि सभी खरीद प्रर्कियाओं को एक प्रबंधन समिति ने मंजूरी दी थी। इस समिति में पेट्रोलियम मंत्रालय तथा डीजीएच के नामित प्रतिनिधियों को विशेष (वीटो) अधिकार था।

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