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देश के पहले राष्ट्रपति के साथ ऐसी बेरुखी सही नहीं

रांची। संवाददाता। शुक्रवार को भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की पुण्यतिथि पर शाम तक कुछेक संगठनों को छोड़ किसी ने एक फूल तक चढ़ाने की तोहमत नहीं की। देश के पहले भारत रत्न की यह दशा हमारे समाज की मानसिक दशा को दर्शाती है। यह पूरे समाज पर सावलिया निशान है। सरकार तो सोती ही रही, समाज भी नहीं जागा। शायद समाज को इसकी जरूरत महसूस नहीं हुई। सवाल यह है देश के रत्नों की इस दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेवार है? युवाओं की राय..सीलिया - यह हम सभी के लिए शर्म की बात है।

देश के पहले राष्ट्रपति को उनके जन्मदिन पर इस तरह की बेरुखी, बहुत गलत है यह। मणी - किसी के जन्मदिन पर पूरा अखबार, शहर में विज्ञापन, कार्यक्रम, होते हैं। देश के पहले राष्ट्रपति को उनके जन्मदिन पर इस तरह की बेरुखी, अच्छा नहीं लगा। ज्ञानदेव - मुझे तो याद भी नहीं आता कि राजेंद्र प्रसाद के नाम पर कोई योजना या परियोजना देश में चल रही हो। महापुरुषों के साथ इस तरह का व्यवहार गलत है। चंदन - हम छात्रों ने भी तो नहीं याद किया।

कहीं कोई कार्यक्रम नहीं, कोई चर्चा नहीं, नेताओं के लिए, छात्रों के लिए बहुत ही शर्मनाक बात है। शीला - पहले भारत रत्न हैं राजेंद्र प्रसाद और उनके साथ इस तरह का व्यवहार किया गया, यह निंदनीय है। एक सरकारी कार्यक्रम तक नहीं हुए। परिजात - समाजसेवी, राजनेता, देशभक्त नेता और जाति के नाम पर राजनीति करनेवाले लोग मुंह ताक रहे थे क्या? एक माला तक नहीं चढ़ाया किसी ने।

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