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चाय चौपालः आओ राजनीतिक करे

सबसे बड़ी समस्या यह है कि चुनाव के बाद जनता के प्रतिनिधि जनता से दूर चले जाते हैं। जब भी समस्या होती है, उन्हें तलाशना पड़ता है। जनप्रतिनिधि को जनता को दायित्व का अहसास होना चाहिए। यह वही प्रतिनिधि कर सकता है, जिसको अपने कर्तव्य का अहसास हो। -मोहन गोस्वामी, सामाजिक कार्यकर्ता

ऐसे जनप्रतिनिधि को न चुनें, जिसे कानून की समझ न हो। संसद में कानून बनाने के लिए भेजा जाता है। मौजूदा प्रतिनिधियों ने कंपनी एक्ट को तहस-नहस कर दिया है। उसके हर अनुच्छेद का आसानी से उल्लंघन किया जाता है। कंपनी एक्ट का मतलब है कि किसी भी संपदा का सभी को बराबर हिस्से में अधिकार मिल सके। -निशांत अखिलेश, लोक स्वातंत्र्य संगठन

जनप्रतिनिधि संसदीय आचरण वाला व्यक्ति हो और साथ ही साथ कानून को समझने वाला भी हो। संसद में उसकी पर्याप्त उपस्थिति हो, न कि हाजिरी लगाने वाली। खास बात यह कि वह लुटेरों का हिमायती न हो। हाल के वर्षो में सात हजार करोड़ रुपये के खनिज को लूटा गया है। -अरविंद अंजुम,

जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी आम जनता को समझाने की जरूर है कि वह एक अच्छे प्रत्याशी को चुने, जो हम सभी के बारे में सोचता हो। सौ साल बाद भी जमशेदपुर के लोगों को गांव जाने के लिए अच्छी ट्रेन नहीं मिल पाती है। उनकी आवाज संसद में कोई नहीं उठाता है, बल्कि जनप्रतिनिधि उन्हें बेवकूफ बना रहे हैं। -अरुणा मिश्रा, बॉक्सर

जनप्रतिनिधियों का घोषणा पत्र भी झूठा होता है। ये लोग वादा करते हैं और चुनाव जीतने के बाद भूल जाते हैं। याद भी रहे तो वह अपने मतलब का ही काम करते हैं। जनप्रतिनिधियों को दायित्व का बोध कराना होगा। उन्हें अहसास करना होगा कि वह जनता के सेवक हैं। काम नहीं करने पर मुश्किल में पड़ सकते हैं। -प्रेमचंद, फ्री लीगल एड सर्विस

जनप्रतिनिधि संविधान में विश्वास करने वाला हो। जमशेदपुर की सबसे बड़ी समस्या तीसरे वोट का अधिकार दिलाना वाला भी हो। स्थानीय निकाय के अभाव में लोग हर तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। जमशेदपुर के लोग पांच तरह की जिंदगी जी रहे हैं, उन्हें एक जिंदगी जीने के लायक बनाना होगा। -जवाहरलाल शर्मा,

मानवाधिकार कार्यकर्ता आम चुनावों में महिलाओं को स्वतंत्र होकर मतदान करना होगा। पति या घर के दबाव में मतदान करने की जरूरत नहीं है। उद्योग जगत को भी चाहिए कि वह अपनी कंपनियों में आधी सीटों पर महिलाओं को पदस्थापित करें, तब जाकर परविर्तन का दौर दिखने लगेगा। -ममता सिंह, अधिवक्ता।

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