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अरबों रुपए पड़े हैं, फिर भी विकास नहीं

धनबाद मुख्य संवाददाता। जिले में विकास तथा अन्य मद में 1.5 अरब से भी अधिक की राशि है, इसके बाद भी जिले में तेजी से विकास नहीं हो पा रहा है। अलग-अलग विभागों को यह राशि मिली है। वित्तीय वर्ष खत्म होने में अब मजह 30 दिन शेष रह गए हैं। लेकिन राशि बैंकों या फिर कोषागार की शोभा बढ़ा रही है।

यह राशि चालू वित्तीय वर्ष में जिले के विभिन्न विभागों को खर्च करने के लिए दी गई थीं। फाइल में विकास की योजनाएं तो बन रहीं हैं, लेकिन जमीन पर इसे उतारा नहीं जा रहा है। बात ग्रामीण विकास से जुड़े मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) की हो या फिर बैकवर्ड रीजन ग्रांट फंड (बीआरजीएफ) की।

योजनाएं तो बनी लेकिन अधिकतर पूरी नहीं हुई। मनरेगा में चार हजार योजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन एक हजार योजनाएं ही पूरी हो सकी हैं। बैकवर्ड रीजन ग्रांट फंड की योजनाओं की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। इस मद से 50 पंचायत भवन तथा 80 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण किया जाना था, लेकिन काम अधूरा है और राशि पड़ी हुई है। इंदिरा आवास योजना की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। इस मद में तीन हजार से अधिक इंदिरा आवास बनाने का लक्ष्य था, लेकिन अधिकतर आवास का काम अभी शुरू नहीं हुआ है और राशि बची हुई है।

विधायक मद की योजनाओं की स्थिति भी ठीक नहीं है। चालू वित्तीय वर्ष के लिए 18 करोड़ रुपए दिए गए हैं। कोषागार से निकाल लिया गया है। राशि डीआरडीए के खाते में है, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ है।

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