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आमस में मोटर बंगले वालों को मिले इंदिरा आवास

निज संवाददाता शेरघाटी। मोटर-बंगले वालों और बड़ी जोत के किसानों को इंदिरा आवास का गिफ्ट देने वाले आमस के तत्कालीन बीडीओ के खिलाफ शुरु की गई जांच तीन साल का अर्सा गुजर जाने के बावजूद पूरी नहीं हो सकी। जांच की फाइल मोटी होते जाने और रिपोर्ट-दर-रिपोर्ट भेजे और प्राप्त किए जाने के बावजूद कार्रवाई के नाम पर अब तक सफिर ही है।

भ्रष्टाचार के प्रति सरकार के जीरो टॉलरेंस के दावे और इरादे की अनदेखी कर जांच में सुस्ती बरतने वाले अधिकारियों पर ही अब मामले को ठंढे बस्ते में डालने के आरोप लग रहे हैं। मामला आमस के तत्कालीन बीडीओ जगदानंद दुबे के कार्यकाल का है।

तब आमस प्रखंड के कई गांवों में ट्रकों और मोटरसाइकिलों के मालिकों को भी इंदिरा आवास दिए जाने की शिकायत पर शेरघाटी की तत्कालीन एसडीओ आशिमा जैन ने मामले की जांच कर अपने पत्रांक 621 के माध्यम से 14 जून 2011 को एक रिपोर्ट जिला मुख्यालय भेजी थी।

रिपोर्ट में कई सबूतों और साक्ष्यों को भी नत्थी किया गया था। इसके बाद पून: उसी शिकायत की जांच गया के जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के निदेशक से कराई गई। जांच में सामने आए तथ्यों पर बीडीओ से स्पष्टीकरण मांगा गया।

बाद में समीक्षात्मक प्रतिवेदन तथा बीडीओ के खिलाफ तैयार किए गए प्रपत्र क में शामिल किए गए आरोपों के प्रति बीडीओ की असहमति वाले बिंदुओं की पुन: जांच कर शेरघाटी के एसडीओ से प्रतिवेदन मांगे जाने के नाम पर मामले का लटका दिया गया।

सूत्र बताते हैं कि फिर 30 अगस्त 13 को वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान पटना स्थित ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने जिले के अधिकारियों से भ्रष्टाचार के आरोपो से घिरे आमस के तत्कालीन बीडीओ के मामले में पुन: मंतव्य उपलब्ध कराने को कहा।

इसके बाद गया के विशेष कार्य पदाधिकारी ने 2 सितम्बर 13 को शेरघाटी के एसडीओ को चिट्ठी लिख कर मंतव्य की मांग की। जाहिर है कि जांच के नाम पर तीन वर्षो से ज्यादा चली कवायद का अबतक कोई नतीजा सामने नहीं आया है।

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