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बिहार में सफेद बाघों की संख्या बढ़कर हो जाएगी पांच

पटना। नीरज कमल। सफेद बाघ बिहार के किसी भी जंगल में नहीं पाया जाता है। यहां तक की बाल्मीकिनगर व्याघ्र प्रोजेक्ट क्षेत्र में भी सफेद बाघ नहीं है। ये बाघ सिर्फ संजय गांधी जैविक उद्यान में ही देखे जा सकते हैं। मार्च के पहले सप्ताह में तीन सफेद शावक जन्म लेने वाले हैं। उद्यान प्रशासन तो तीन से अधिक शावकों के जन्म लेने की कयास लगाए बैठा है।

एक तरफ उम्मीद भरी खुशी है तो दूसरी तरफ एक बड़ी चुनौती भी। पिछली बार की तरह इस बार भी जन्म लेने वाले शावकों को खोने का डर भी बना हुआ है। इस बार तैयारी जोरेा पर है। हर तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। अभी से ही 24 घंटे दो सीसीटीवी कैमरे से मॉनिटरिंग किया जा रहा है। हैदराबाद जू से वर्ष 2011 में सफेद बाघ लाया गया था। तब से आज तक इनकी संख्या नहीं बढ़ी है।

तीन साल बाद सफेद बाघिन स्वर्णा और नर बाघ भीमा के मिलन से तीन से अधिक शावकों का जन्म होने वाला है। इस बार उद्यान प्रशासन जन्म लेने वाले बच्चों को बचा ले, तो इनकी संख्या पांच हो जाएगी। खास बात यह है कि सफेद बाघ देश में सिर्फ मध्य प्रदेश के रीवा के जंगल में ही पाया जाता है। जू के निदेशक एस. चंद्रशेखर ने बताया कि शावक को जन्म देने वाले बाघों की देखभाल पूरी तैयारी के साथ की जा रही है।

बाघिन को नाइट हाउस में रखा गया है। ये बाघ सफेद क्योंसफेद रंग के बाघ भी अन्य बाघों की तरह सामान्य प्रजाति के होते हैं। जेनेटिक एक्सप्रेशन के तहत कभी-कभी उनके जीन में अचानक से आए बदलाव के कारण ही उनका रंग सफेद हो जाता है। देश में सबसे पहले मध्य प्रदेश के रीवा के राजा ने सफेद बाघ को देखा था।

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