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सरकारी मशीनरी के नाम फर्जीवाड़ा पड़ेगा महंगा

पटना। हिन्दुस्तान ब्यूरो। सूबे में सरकारी मशीनरी के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाली सहकारी समितियों या स्वैच्छिक संस्थाओं पर नकेल कस गई है। ये संस्थाएं अपने किसी काम या योजना को सरकारी जामा भी नहीं पहना सकेंगी। खासकर बहाली के मामले में बरगलाने वाली कोई हरकत नहीं कर सकेंगी।

उनके कामकाज को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। सरकार ने यह पाया कि कई सहकारी समितियां और संस्थाएं अपने कार्यो को सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन का अंग बता कर प्रचारित करती हैं। इसके बाद चलता है फर्जी बहाली का दौर। विभिन्न सरकारी पदों से मिलते-जुलते नाम वाले पद क्रिएट कर बहाली का विज्ञापन निकलवाते हैं और चेक, ड्राफ्ट से मोटी रकम वसूल लेते हैं। जबकि उनकी कोई जानकारी सरकार या विभाग के पास नहीं होती।

विज्ञापनों में सरकारी ‘लोगो’ और नारों का भी बखूबी इस्तेमाल किया जाता है। सहकारिता विभाग के नाम पर ऐसे ही एक बड़े फर्जीवाड़े के बाद सरकार को उस संस्था के खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी पड़ी। इस घटना के बाद ऐसी फर्जी ‘सरकारी’ बहालियों पर सरकार की कड़ी नजर है। अवक्रमित या परिसमापित समितियों को किसी तरह की बहाली का कोई अधिकार नहीं रहेगा। साथ ही बायलॉज का उल्लंघन कर बहाली के किसी भी प्रयास या सरकारी प्रतीक चहि्नें के इस्तेमाल पर तुरंत एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

साथ ही सरकारी विभाग या एजेंसी के माध्यम से भी ये समितियां/संस्थाएं सीधे विज्ञापन जारी नहीं करा सकेंगी। अगर ऐसा होता है तो ‘बिहार विज्ञापन नीति 2008’ का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। ये संस्थाएं सीधे विज्ञापन न छपवाएं, इसके लिए सभी सचिवों, आयुक्तों से लेकर जिलाधिकारियों को तुरंत सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है। इस नीति का उल्लंघन कर मनमाने तरीके से छपवाये गए विज्ञापनों के दोषी पदाधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।

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