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खिलाड़ियों को नौकरी की घोषणा को अमल में लाएं

नवगछिया (नि.सं.)। वॉलीबॉल में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कामयाबी पाने वाले खिलाड़ी सरकार की उदासीनता से आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। समाज के दकियानुशी विचारों से हटकर घर की चहारदीवारी से बाहर निकलकर मैदानों में कामयाबी का परचम लहराने वाली बालाएं भी सरकार की ओर आशा भरी नजरों से देख रही हैं। नेशनल खिलाड़ी के रूप में राजस्थान, केरल, चेन्नई, गोवा, ग्वालियर में अपना हुनर दिखा चुकी बांका की श्रृष्टि कुमारी, सपना, काजल कुमारी सरकार से सहयोग की आश लगाये बैठी हैं।

वर्ष 2010 से लगातार नेशनल खेल रही बांका टीम की कप्तान श्रृष्टि कहती हैं कि 13 नेशनल खेल चुके हैं लेकिन सरकार की तरफ से कोई सुविधा नहीं मिली है। सरकार पांच वर्ष से नेशनल खिलाड़ियों को नौकरी देने की बात कर रही है परंतु आज तक दिया नहीं। सपना, काजल चपरी गांव की है। वह कहती है कि गांव में लोगों के विरोध के बाद मम्मी-पापा के प्रोत्साहन पर खेल में नेशनल स्तर तक पहुंचे। अभी टीएनबी में बीए में पढ़ रही हूं।

साथ ही वॉलीबॉल खेलने में भी ध्यान देती हूं परंतु फिर भी लगता है कि हम लोगों का भविष्य क्या होगा। खेलने के लिए आने-जाने में संघ सहायता करते हैं परंतु भविष्य अंधकारमय है। किशनगंज साईं टीम के धुरंधर खिलाड़ी हिमांशु झा कहते हैं कि खिलाड़ियों का भविष्य अंधकारमय है।

दूसरे राज्यों में नेशनल खेलने जाते हैं तो पता चलता है कि वहां पर नेशनल खेलने वालों को सरकार हर तरह की सुविधाएं दे रही है। यहां पांच वर्ष से सिर्फ सुन रहा हूं, जमीन पर कुछ भी नहीं है।

यहीं के अनुभव कुमार, हुकूम सिंह कहते हैं कि साईं सेंटर नेशनल गर्वमेंट का है, यहीं पर हम लोग को कोच ट्रेनिंग देते हैं। सरकार ने नेशनल खिलाड़ियों को रेलवे, बिहार पुलिस में नौकरी में प्राथमिकता देने की जो घोषणा की है उसपर अमल भी होना चाहिए।

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  • Web Title:खिलाड़ियों को नौकरी की घोषणा को अमल में लाएं