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भूमिहीनों के लिए पास हुआ था पहला बिल

3 अप्रैल 1952 को पहली राज्यसभा का और 17 अप्रैल को लोकसभा का गठन हुआ। संसद में सबसे पहला विधेयक भूमि सुधार पास हुआ था। लोकसभा के पांच वर्ष के कार्यकाल में 14 सत्र आयोजित  हुए और राज्ससभा के 15 सत्रों का आयोजन हुआ। इस दौरान सदन में 333 विधेयक पास हुए थे, जिनमें छह संविधान संशोधन भी शामिल थे।


पहली संसद
भारत में चार महीने तक चले पहले आम चुनाव के बाद 17 अप्रैल 1952 को पहली लोकसभा का गठन हुआ। इससे पहले 3 अप्रैल को पहली राज्यसभा का गठन हुआ। सीटों के चक्र को बरकरार रखने के लिए राज्यसभा के एक तिहाई सदस्यों का चुनाव दो वर्ष, अन्य एक तिहाई सदस्यों का चुनाव चार वर्ष और बाकी बचे एक तिहाई सदस्यों को चुनाव छह वर्ष के लिए किया गया।

सिर्फ 20 महिला सांसद
संसद में महिलाएं अल्पमत में थीं। संसद के दोनों सदनों में कुल मिला कर 20 महिला सदस्य थीं। इनमें कुछ ही जाने-पहचाने नाम थे। जैसे राजकुमारी अमृत कौर, सुचेता कृपलानी, उमा नेहरू, अम्मू स्वामीनाथन और जी. दुर्गाबाई। सबसे अधिक चार महिला सांसद मद्रास से थीं। जीवी मावलंकर को अध्यक्ष चुने जाने की बधाई देते समय सांसद कुमारी एनी मैस्कैरेने ने कहा था, ‘यहां उपस्थित बहुत कम महिलाओं की ओर से मैं उम्मीद करती हूं कि आप हमें पूरी सुरक्षा और अपनी बात रखने का पूरा मौका देंगे।’

पहला दिन
13 मई को संसद के दोनों सदनों के पहले सत्र की शुरुआत हुई। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सुबह 10:45 बजे शुरू हुई और सबसे पहले दो मिनट का मौन रखा गया। लोकसभा में जीवी मावलंकर को अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया गया। सांसदों को शपथ दिलाने की कार्यवाही शुरू करने से पहले मावलंकर ने सभी से कहा कि जहां तक संभव होगा वह सभी सदस्यों का नाम सही उच्चरित करेंगे, लेकिन इसके बाद भी यदि कोई गलती होती है तो मुङो उसके लिए क्षमा करें। पहले दिन शपथ लेने वालों में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी थे। पहले दिन सभी सांसद शपथ नहीं ग्रहण कर पाए थे।  

पहला काम
संसद में सबसे पहला काम भूमि सुधार विधेयक को पास करने के रूप में हुआ। इसके तहत भूमिहीन लोगों को भूमि उपलब्ध कराने के लिए कानून बनाया गया।

333 विधेयक हुए पास
पहली लोकसभा ने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल (13 मई 1952 से 22 मई 1956) में 14 सत्र आयोजित किए। इस दौरान राज्यसभा के 15 सत्रों का आयोजन किया गया। इस दौरान संसद में नये लोकतंत्र के लिए जरूरी 333 विधेयक पास किए गए। इनमें बैंकिंग, मुद्रा, इंश्योरेंस, वाणिज्य, उद्योग, रक्षा, शिक्षा, राजस्व, वित्त, स्वास्थ्य, कानून और अन्य कई क्षेत्रों के लिए जरूरी विधेयक शामिल थे। इस दौरान छह संविधान संशोधन भी किए गए।

सांसदों की शिक्षा
पहली संसद में बड़ी संख्या में सांसद स्नातक थे। करीब 75 सांसद कानून में स्नातक या परास्नातक थे। करीब 35 सांसद कला या विज्ञान में परास्नातक थे। 15 से अधिक सांसदों ने विदेश से स्नातक की उपाधि हासिल की हुई थी। इनमें कुछ प्रसिद्ध नाम थे, जैसे बीआर अंबेडकर (कोलंबिया यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स), पंडित जवाहरलाल नेहरू (हैरो स्कूल, ट्रिनिटी कॉलेज, कैंब्रिज), मेजर जनरल हिम्मत सिंहजी (माल्वेन कॉलेज, ऑक्सफोर्ड), सरदार वल्लभभाई पटेल (मिडिल टेंपल, इंग्लैंड), हृदयनाथ कुंजरू (लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स), एचजी मुदगल (न्यूयॉर्क कॉलेज) आदि।

संसद में बड़े नाम
जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, वल्लभभाई पटेल, बीआर अंबेडकर, अबुल कलाम आजाद, एके गोपालन, सुचेता कृपलानी, जगजीवन राम, सरदार हुकम सिंह, अशोक मेहता और रफी अहमद किदवई।  

कुछ आंकड़े

20  फीसदी सांसदों की आयु 56 वर्ष या उससे अधिक थी
70 वर्ष से अधिक का कोई भी सांसद पहली संसद में नहीं था
26 प्रतिशत सांसदों की आयु 40 वर्ष या उससे कम थी
 677 बैठकें हुईं पहली लोकसभा के दौरान
 3784 घंटे चली पहली लोकसभा के दौरान कार्यवाही



किस पार्टी के कितने सदस्य
पार्टी                सांसद
भारतीय जनसंघ     03
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी    16
फॉरवर्ड ब्लॉक (एमजी)    01
अखिल भारतीय हिंदू महासभा    04
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस     364
कृषिकर लोक पार्टी     01
किसान मजदूर प्रजा पार्टी    09
राम राज्य परिषद    03
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी     03
शेडय़ूल कास्ट फेडरेशन    02
सोशलिस्ट पार्टी     12
अन्य पार्टियां    34
निर्दलीय    37
कुल    489  




लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
’ जीवी मावलंकर लोकसभा के पहले अध्यक्ष थे। उनका कार्यकाल (15 मई 1952 से 27 फरवरी 1956) रहा। उनके सहयोगी एमए अयंगर लोकसभा के पहले उपाध्यक्ष थे। उनका कार्यकाल 30 मई 1952 से 7 मार्च 1956 तक रहा।

राज्यसभा
देश के पहले उपराष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन ने काउंसिल ऑफ स्टेट्स की अध्यक्षता की। 23 अगस्त 1954 को राधाकृष्णन ने ही ऊपरी सदन का हिंदी नामकरण ‘राज्यसभा’ किया। इसके 238 सदस्यों का चुनाव होता है, जबकि 12 सदस्यों को राष्ट्रपति नामित करते हैं। उस समय एसवी कृष्णमूर्ति राव राज्यसभा के उपसभापति थे। 

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