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साजिद को जमीन मिली रहने के लिए छत नहीं

दस वर्षीय मेधावी छात्र साजिद अंसारी को जमीन तो मिली पर सिर छुपाने के लिए छत नहीं मिली। वह झुग्गी-झोपड़ी में रहने को विवश है। उसके पिता कलीम अंसारी बेरोजगार हैं। वह अपने बेटे साजिद को शिक्षित बनाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने समाज के प्रबुद्ध लोगों से आराू विनती कर साजिद के पढ़ने की व्यवस्था तो कर ली है, लेकिन उसके तथा अपने परिवार के सिर छुपाने के लिए अपना छोटा सा आशियाना नहीं बना पा रहे हैं। कलीम अंसारी पहाड़ी के पास झुग्गी-झोपड़ी में रहते हैं। बरसात के दिनों में पूरा परिवार बेहाल है।ड्ढr उन्होंने किसी तरह कलीम ने रातू पिंडरा में एक टुकड़ा जमीन तो ले ली है, पर उस पर आशियाना खड़ा करना उसके बूते की बात नहीं। एक प्रबुद्ध व्यक्ित की सिफारिश पर राज्यपाल सैयद शिब्ते राी ने पहल की और साजिद का नामांकन स्थानीय गुरुनानक स्कूल में हो गया। उसकी शिक्षा नि:शुल्क है। कलीम कहता है कि पढ़ने के लिए साजिद को छत मिल गयी, तो वह अपने मकसद में कामयाब हो जायेगा। झारखंड समेत छत्तीसगढ़ के रायपुर में काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर से मेधावी साजिद को चार-चार बार पुरस्कृत किया गया है।

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