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अब नगर निगम संभालेगा सफाई का जिम्मा

देहरादून। कार्यालय संवाददाता। शहर में घर-घर कचरा कलेक्शन का जिम्मा संभाल रही कंपनी डीवीडब्ल्यूएम और नगर निगम के बीच करार टूट गया है। नगर निगम ने कंपनी को दिए सभी उपकरण और वाहन वापस ले लिए हैं। अब नगर निगम पूरी तरह से शहर की सफाई व्यवस्था संभालेगा। हालांकि रविवार से डोर टू डोर कूड़ा उठान भी प्रभावित हो सकता है।

नगर निगम के अधिकारियों का दावा है कि शहर में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखा जाएगा। डीवीडब्ल्यूएम कंपनी और नगर निगम के बीच का गठबंधन नाजुक मोड़ पर आकर टूट गया है। कंपनी ने इससे पहले नगर निगम को काम छोड़ने के दो नोटिस दिए थे। अंतिम नोटिस की एक माह की अवधि शनिवार को खत्म हो गई। इस अवधि में भी नगर निगम अधिकारियों ने कंपनी से विवादों को सुलझाने की कोई पहल नहीं की। नतीजा यह हुआ कि कंपनी अब दून से अपना सामान समेट रही है।

एमएनए अशोक कुमार ने एक कमेटी बनाकर कंपनी को दिए गए सफाई उपकरण, वाहन वापस ले लिए हैं। हालांकि एमएनए ने दावा किया है कि सिर्फ कंपनी से करार टूटा है। इससे शहर की सफाई व्यवस्था पर कोई फर्क नहीं आएगा। नगर निगम पहले भी शहर की सफाई करता था। फिर से करेगा। डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने का काम पहले की तरह चलता रहेगा। कंपनी के साथ काम कर रहे सुपरवाइजर, सफाई कर्मचारी निगम के लिए काम करते रहेंगे। इसके अलावा निगम की अपनी टीम पहले से ही सड़कों की सफाई कर ही रही है।

मेयर एमएनए से कहा ‘निकल जाओ मेरे कमरे से’डीवीडब्ल्यूएम कंपनी से सफाई के काम को टेकओवर करने से पहले शनिवार सुबह करीब साढ़े 12 बजे एमएनए अशोक कुमार मेयर विनोद चमोली से मिलने उनके कक्ष में आए। लेकिन मेयर ने उनसे न सिर्फ इस मसले पर बात करने से इनकार कर दिया बल्कि एमएनए को तत्काल अपने कक्ष से चले जाने को भी कहा। चमोली का कहना था कि, एमएनए की वजह से ही जेएनएनयूआरएमकी योजना का यह हाल हुआ है।

उन्होंने मामले को सुलझाने की बहुत कोशशि की थी लेकिन एमएनए ने ही उनकी बैठक में शामिल होने वाले अधिकारियों को नोटिस थमा दिए थे। आज जब सब कुछ चौपट हो गया तो एमएनए उन्हें अंतिम समय में बता रहे हैं। मेयर ने साफ कहा कि एमएनए को अपनी बात शासन के सामने रखनी चाहिए, चूंकि इससे पहले भी वह यही कर रहे थे। मेयर के अनुसार, सुबह शहरी विकास सचवि डीएस गब्र्याल ने भी इस संबंध में उनसे बात की थी।

लेकिन उन्होंने सचवि से दो टूक कहा कि, जेएनएनयूआरएम का यह प्रोजेक्ट पूरी तरह लोकल बेस्ड इश्यू था। इसमें सरकार बेवजह हस्तक्षेप करती रही। बात मसले का हल उनके हाथ में नहीं है। क्या है डोर-टू-डोर योजनाजेएनएनयूआरएम के सब मशिन यूआईजी के तहत 24.50 करोड़ की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की यह योजना अनेक चरणों में पूरी की जानी थी। इसके तहत घर-घर से कुड़े का उठान, कूड़े का परवहिन, ट्रांसफर स्टेशन, ट्रीटमेंट प्लांट, कम्पोस्ट प्लांट, एसएलएफ का निर्माण किया जाना था।

यहां कंपनी शहर के कचरे को सीसाइकिल करने का काम करती। पीपीपी पाटर्नर डीवीडब्ल्यूएम कंपनी को वर्ष 2011 में 15 वार्ड का जिम्मा दिया गया। जिसे धीरे-धीरे सभी साठ वार्ड में फैला दिया गया। हरिद्वार बाईपास में ट्रांसफर स्टेशन का काम अस्सी फीसदी पूरा हो गया। शीशमबाड़ा में आठ हेक्टेयर जमीन पर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी मिल चुकी है। पिछले तीन साल में डीवीडल्यूएम कंपनी को निगम ने सवा चार करोड़ टिपिंग फीस दी थी, जबकि कंपनी ने साढ़े तीन करोड़ रुपये यूजर चार्ज दूनवासियों से वसूला था।

सवा दो करोड़ रुपये वाहन खरीद अन्य उपकरणों की खरीद पर दिए जा चुके थे। यह है बवाल की जड़कंपनी ट्रीटमेंट प्लांट व ट्रांसफर स्टेशन शुरू हुए बिना काम कर रही थी। कंपनी निदेशक सिद्धार्थ जैन का कहना था कि कूडे का व्यावसायिक इस्तेमाल न कर पाने से कंपनी लगातार घाटे में जा रही थी। इसके लिए उन्होंने निगम से टिपिंग शुल्क बढ़ाने को कहा था। उन्हें टिपिंग शुल्क का भुगतान भी समय पर नहीं हो रहा था। खासकर एमएनए के रवैये से मामला बिगड़ता ही चला गया।

कंपनी के घाटे के आंकड़े झूठे हैं। हमने कंपनी से 42 टाटा एस वाहन, 245 रिक्शा वापस लिए हैं। इनमें से 17 टाटा एस वाहन और 130 रिक्शा खराब हैं। कंपनी का सुपरविजन वाला स्टाफ हमारे साथ काम करेगा। इस प्रोजेक्ट से निगम को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। -अशोक कुमार, एमएनए।

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