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128 जगहों पर होते हैं जानलेवा हादसे

नई दिल्ली, जितेंद्र भारद्वाज।  दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने अपनी एक विशेष शोध रिपोर्ट में सड़क हादसों वाले 128 स्थानों की पहचान की है। इस रिपोर्ट में सड़क हादसे वाले हर स्थान की बारीकि से जांच-पड़ताल की गई है।

न केवल हादसों की वजह, बल्कि उनका निदान भी सुझाया गया है। जब इस शोध रिपोर्ट को उपराज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया गया तो उन्हें ट्रैफिक पुलिस के सुझाव बेहद कारगर दिखे। नतीजा, उपराज्यपाल ने रिपोर्ट पर त्वरित कार्रवाई के लिए सवििक एजेंसियों को निर्देश देने में देर नहीं लगाई। इस रिपोर्ट में दिल्ली की सड़कों पर कई बड़े बदलाव करने की सिफारशि की गई है। बता दें कि दिल्ली की सड़कों पर वर्ष 2012 में 1757 जानलेवा हादसे हुए थे, जिनमें 1801 लोगों की मौत हुई।

पिछले साल भी 1693 हादसों में 1725 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा है। ट्रैफिक पुलिस ने अपनी शोध रिपोर्ट में पाया कि सड़क दुर्घटनाओं की मुख्य वजह वाहनों की तेज रफ्तार ही नहीं है, बल्कि कई दूसरे अहम कारण भी जिम्मेदार हैं। इनमें सड़कों पर पर्याप्त संख्या में ट्रैफिक सिग्नल न होना, स्पीड कॉमिंग स्ट्रिप्स (रफ्तार अवरोधक) का अभाव, सेंट्रल वर्ज व डविाइडर की बनावट सही न होना, रात के समय फ्लाईओवर पर चढ़ते हुए और उतरते समय लेन बदलाव की जानकारी देने वाले चिन्हों की कमीऔर पैदल यात्री सिग्नल न होना आदि शामिल हैं।

इसके अलावा खासतौर से रात 9 बजे के बाद सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी कम होना, भारी वाहनों को एंट्री मिलना और शराब पीकर वाहन चलाना आदि कारण भी सड़क हादसों की वजह बनते हैं। इस कारण भी होते हैं हादसे दिल्ली में 71 जगह ऐसी हैं, जहां पर सेंट्रल वर्ज टूटे पड़े हैं या फिर वहां लगी ग्रिल गायब है। इन्हीं जगहों पर दुपहिया वाहन चालक और पैदल यात्री शॉर्टकट लगाने का प्रयास करते हैं। यही वजह रही कि पिछले साल इन स्थानों पर सौ से ज्यादा सड़क हादसे हुए।

ऐसे मुख्य स्थलों में कमला मार्केट, सदर बाजार, हरहिर मंदिर, रानी झांसी रोड, खजूरी खास, कुतुब रोड पर पुल मिठाई, अशोक वहिार से ब्रिटेनिया पुल तक, हौज खास में अगस्त क्रांति मार्ग, लाजपत नगर, सराय काले खां, रोहतक रोड, रिठाला, बवाना, रोहिणी, सीमापुरी, एमबी रोड, साकेत, भाटी माइंस, पटेल नगर, रामा रोड और नजफगढ़ में छावला स्टैंड आदि सड़कों पर सेंट्रल वर्ज व ग्रिल नहीं हैं। 448 चौराहे भी जानलेवा संकेत चिन्हों से रहित करीब 448 चौराहे भी पैदल यात्रियों और वाहन चालकों के लिए एक बड़ा खतरा बन गए हैं।

कई चौराहों पर जेबरा क्रॉसिंग, स्टॉप लाइन और पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग संकेत गायब हैं तो कहीं पर वे इतने हल्के पड़ गए हैं कि उन्हें दिन में देखना भी आसान नहीं। ज्योमिट्री के हिसाब से रोड की बनावट ठीक न होने की वजह से भी हादसे होते हैं। फ्लाईओवर से तेज रफ्तार में आ रही गाड़ियों पर अंकुश नहीं लगना और एकाएक सड़क की चौड़ाई कम हो जाना भी हादसों की एक बड़ी वजह है। सड़क हादसे वाले 128 क्षेत्रों में से कुछ प्रमुख जगह एम्स, अक्षरधाम मंदिर, आली गांव, ऐम्बियन मॉल, आईएसबीटी कश्मीरी गेट, आश्रम चौक, आजादपुर बस टर्मिनल, आजादपुर चौक, बकौली बस स्टैंड, आजादपुर सब्जी मंडी, बारापुला रिंग रोड, भलस्वा चौक, बुधपुर गंदा नाला, संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर, शवि मूर्ति,धर्मपुरा रेड लाइट, हनुमान मंदिर, चिराग दिल्ली फ्लाईओवर, बुराड़ी चौक, दादा देव अस्पताल, डाबड़ी फ्लाईओवर, शास्त्री पार्क, औखला एस्टेट चौराहा, मुकरबा चौक, द्वारका (सेक्टर-1), पूसा रोड, विजय घाट, टीकरी, सिंघू बॉर्डर, शनि मंदिर, वजीरपुर डिपो, सूरजमल मेट्रो स्टेशन, पंजाबी बाग, पीरागढ़ी चौक और महरौली चौराहा आदि।

2013 में यहां हुए ज्यादा हादसे -आजादपुर चौक पर 8 मरे, 10 घायल -बुराड़ी चौक पर 9, 10-डाबड़ी चौराहे पर 5, 20-पूर्वी विनोद नगर 6, 16-हैदरपुर में 4, 20 -एमएस पार्क पर 3, 14 -निगम बोध घाट पर 8, 14-सीलमपुर में 3, 22-सब्जी मंडी मेट्रो स्टेशन-9, 10 ये होंगे नए बदलाव -सड़कों पर वाहनों की रफ्तार कम करने के लिए क्रेश बेरियर और वाटर बेरियर -हाई फ्रिक्शन रोड बनेंगी, खासतौर पर लालबत्ती और तीखे मोड़ पर -दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में 50-50 मीटर की दूरी पर साइन बोर्र्ड लगेंगे -सेंट्रल वर्ज और डविाइडरों में रिफलेक्टवि टेप -डविाइडरों पर बड़े साइन बोर्ड और गोलाई में सुरक्षा उपकरण लगेंगे -स्ट्रीट लाइट सिस्टम ठीक होगा -मल्टी एक्सल वाहन व कंटेनर आदि चलाने के लिए स्पेशल स्किल ट्रेनिंग का प्रावधान -सुरक्षित सड़कों के अलावा तरतीब से वाहन संचालन -वाहनों के रखरखाव से संबंधित वशि्वस्तरीय मापदंड -सड़क का इस्तेमाल करने वालों के व्यवहार में बदलाव -हादसे के बाद त्वरित राहत-बचाव कार्य, जैसे एंबुलेंस, अस्पताल ट्रॉमा सेंटर और बेहतरीन आपातकालीन सेवाएं -सड़कों पर ट्रैफिक के पर्याप्त चिन्ह -एक ही कॉरिडोर में अलग-अलग रफ्तार का नियम नहीं होगा -सड़क व चौराहों की बनावट में सुधार -रात में भी ट्रैफिक पुलिस की तैनाती -ओवर स्पीड व खतरनाक ड्राइविंग पर नियंत्रण का प्रयास -नो एंट्री का नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई -चौराहों के आसपास व फ्लाईओवर के नीचे रफ्तार पर अंकुश लगाने के लिए सड़क पर करीब आधा इंच ऊंचाई और डेढ़ फुट लबी पट्टी (रंबल्स) बनाई जाएंगी।

-ट्रैफिक पुलिस के डय़ूटी ऑवर बढ़ाए जाएं -रफ्तार पर रोक लगाने के लिए स्पीड कॉमिंग स्ट्रिप्स का इस्तेमाल -ओवरस्पीड और खतरनाक ड्राइविंग को रोका जाए -चौराहों का नक्शा और सर्विस रोड की जानकारी -किस रोड पर कितने ट्रैफिक सिग्नल -जल भराव वाली सड़कों की जानकारी -सड़क हादसा संभावित क्षेत्री की सूची (मानचित्र सहित) -शॉर्प टर्न की जानकारी वर्जन ट्रैफिक पुलिस ने अपनी रिपोर्ट पर काम करना शुरू कर दिया है। चूंकि सड़क पर किए जाने वाले बड़े बदलावों की जिम्मेदारी सवििक एजेंसियों के कंधों पर है, इसलिए उन्हें त्वरित गति से काम करना होगा।

अनिल शुक्ला, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक)।

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