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मनोरंजन और सामाजिक संवेदना में अंतर्विरोध कहां

एंटरटेनमेंट चैनल में सामाजिक संदेश की बातें नहीं होतीं, आप कैसे कर रहे हैं?
किसी भी माध्यम में, चाहे वह अखबार हो या टीवी, यदि आप कंटेंट और क्रिएटिविटी में सामाजिक एजेंडे को आगे नहीं बढ़ाते हैं, तो आप चूक जाते हैं और अप्रासंगिक हो जाते हैं। मनोरंजन व सामाजिक संवेदना में अंतर्विरोध कहां है और किसे है? मैं न्यूज से इस क्षेत्र में आया। राजनीति व पर्यावरण की रिपोर्टिग के दौरान मैंने महसूस किया कि पत्रकारिता आपको बेहतर समाज बनाने का मौका देती है। ऐसे में, जब आप टीवी में हैं, चाहे वह स्पोर्ट्स चैनल हो या मनोरंजन चैनल, तो सोशल एजेंडा सबसे ऊपर होता है। संभव है कि आप लाखों-करोड़ों का कुछ भी बनाएं, पर सत्यमेव जयते  जैसे कार्यक्रम का एक अहम रोल होता है।

स्टार न्यूज पर इसे बंद करना पड़ा था, पर आप रुके क्यों नहीं?
सत्यमेव जयते, ये दो शब्द मुझे बेहद प्रेरित करते हैं। बड़ा गूढ़ अर्थ है कि सच की ही विजय होती है। मीडिया की भी यही फिलॉसफी है। सामाजिक संवेदना व सरोकार के लिए इससे बढ़िया कार्यक्रम क्या हो सकता है? जिंदगी में एक दौर ऐसा आता है, जब चीजें उलटने-पुलटने लगती हैं। स्टार न्यूज में हम सच्ची स्टोरी और सच्चे मायने के साथ इसे लेकर आए थे। पर कई कारणों से, उनमें आर्थिक कारण भी हैं, इसे बंद करना पड़ा। होता है, पहला प्रयोग कई बार सफल नहीं होता। जब मुझे फिर मौका मिला, तो मैंने सोचा कि जो आज की परिकल्पना है, जिन जिम्मेदारियों के प्रति हमारी सजगता है, उन दायरों में कैसे एक बड़ी छलांग लगाई जाए? आमिर खान एक स्टार हैं, जो सामाजिक विषयों पर सोचते और उन पर फिल्म करते हैं। रंग दे बसंती, तारे जमीं पर  और थ्री इडियट्स  जैसी फिल्में उन्होंने कीं। हमें लगा कि जब सिनेमा में यह सब हो सकता है, तो उन्हें साथ लेकर टीवी में भी किया जा सकता है। सेलिब्रिटी की ताकत का हमने सही इस्तेमाल किया।

सत्यमेव जयते  सीजन-1 का प्रभाव समाज से लेकर व्यवस्था तक पर पड़ा। आप इनमें से किससे प्रभावित हुए?
दो चीजों से। पहली, धारणा थी कि पढ़ा-लिखा मध्य वर्ग सामाजिक विषयों में रुचि नहीं दिखाता, जो गलत साबित हुआ। उच्च मध्यवर्ग ने इसे देखा, प्रतिक्रियाएं दीं। हमारी सनक भरी सोच को उसने तोड़ा। दूसरी, नौजवान और टीनएजर ने बताया कि वे मस्ती नहीं, बदलाव के मूड में हैं। हमें एक अरब डिजिटल इंप्रेशन मिला। इस शो के बाद एक अन्य कारण से दिल्ली की सड़कों पर मध्यवर्ग उतरा, जो बताता है कि यह तबका जागरूक है और सामाजिक विषयों में रुचि रखता है।

क्या आप ‘टीवी के अरविंद केजरीवाल’ बनना चाहते हैं?
मुझे यह ‘टैग’ नहीं चाहिए। सामाजिक सुधार में टीवी की विशेष भूमिका को मैं भी नहीं मानता, पर मीडिया तो सामाजिक बदलाव का एक यंत्र है। जरा सोचिए, लोग अखबार या चैनल की तरफ ध्यान से क्यों देखते हैं? क्योंकि वे आपसे-हमसे सामाजिक जिम्मेदारी की अपेक्षा रखते हैं। हर व्यक्ति सोने से पहले रोजाना औसतन दो से तीन घंटे टीवी देखता है। यह सही है कि हम एंटरटेनमेंट नहीं करेंगे, तो लोग टीवी देखना बंद कर देंगे। पर एंटरटेनमेंट व सोशल एजेंडा साथ भी तो हो सकता है। हम दीया और बाती  लेकर आए। यह एक महिला की कहानी है, जो विषम हालात में आगे बढ़ती है और हम सफल रहे हैं।

पर जब देश इलेक्शन मोड में हो, तब ऐसे कार्यक्रम को लाना जोखिम भरा होता है?
देखिए, हम एक्टिविजम करने नहीं आए हैं, क्योंकि यह हमारा काम नहीं। मीडिया का काम किसी विषय पर तथ्य, अनुभव व सही पृष्ठभूमि पेश करना है, ताकि लोग गुमराह न हों। शो में पार्टी-पॉलिटिक्स नहीं है। हमने वे विषय उठाए, जो हर समय में मौजूं हैं। इलेक्शन से पहले भी और उसके बाद भी।

प्रमोशन के लिए आप गया गए थे..
(बीच में ही..) प्रमोशन के लिए नहीं गया था, बल्कि पिछले आखिरी एपीसोड में हमने दशरथ मांझी के बारे में बताया था और इस बार हम उनकी समाधि पर गए। जर्नी जहां खत्म हुई थी, वहीं से हमने शुरू की है।

इस सीजन में क्या अलग और नया है?
इसे सीजन में मत बांटिए। सत्यमेव जयते का हर एपीसोड एक कंपलीट आइडिया है। हम बाल यौन शोषण से लेकर महिला सशक्तीकरण जसे तमाम ज्वलंत सामाजिक मुद्दों की पैकेजिंग एक बेहतर समाज को बनाने के लिए कर रहे हैं। हम कुछ एपीसोड लेकर आए, फिर ब्रेक लिया, यह देखा कि समाज पर इसका क्या प्रभाव पड़ा है? हम फिर एपीसोड लेकर आए हैं, फिर ब्रेक लेंगे, यह सिलसिला चलता रहेगा। इस बार की थीम है, ‘जिन्हें देश की फिक्र है।’

मार्केट फोर्स को कैसे बैलेंस कर रहे हैं?
स्टार का बड़ा नेटवर्क है। यह ग्लोबल मीडिया कंपनी है। हम दर्शकों के लिए दिल से कार्यक्रम बनाते हैं। मुनाफा मकसद है, पर जब हजारों कार्यक्रम बनते हों, तब एक-दो ऐसे कार्यक्रमों का नफा-नुकसान नहीं देखा जाता। कंपनी ने मुझे कहा कि आप इसे करिए और देखिए कि हमने कंटेंट व इंटेग्रिटी से समझौता नहीं किया।

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