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नई पीढ़ी के लिए बचाएं वन्य-जीव

ब्रिटिश शाही परिवार में प्रिंस चार्ल्स व राजकुमारी डायना के बड़े बेटे और क्वीन एलिजाबेथ के पोते प्रिंस विलियम की शुरुआत से ही सामाजिक कार्यों, खासकर पर्यावरण से जुड़े मुद्दों में गहरी दिलचस्पी रही है। पेश हैं, वाइल्ड लाइफ लंदन कांफ्रेंस में उनके भाषण के अंश:

गंभीर मुद्दा
मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि यहां दुनिया भर के देशों के राष्ट्राध्यक्ष, वरिष्ठ मंत्री और विशेषज्ञ आए हैं। हम सब यहां वन्य-पशुओं की रक्षा पर चर्चा के लिए एकत्र हुए हैं। यह बेहद संवेदनशील विषय है। मेरे पिता प्रिंस चार्ल्स भी इस कांफ्रेंस में शामिल होंगे। वन्य-जीव रक्षा को लेकर वह बेहद संजीदा हैं और लंबे समय से पशुओं के संरक्षण को लेकर अपनी आवाज उठाते रहे हैं। मेरे दादाजी भी वन्य-जीव सुरक्षा को लेकर बहुत गंभीर थे और उन्होंने भी इस मुद्दे पर कई साल काम किया। हमारा परिवार वन्य-जीवों की हत्या को लेकर चिंतित है। मैं और आप, सब यहां एक मकसद के लिए एकत्र हुए हैं। हम चाहते हैं कि दुनिया में पशुओं की गैर-कानूनी ढंग से हो रही हत्याएं व तस्करी रोकी जाएं। हम चाहते हैं कि आप सब अपनी ताकत और प्रभाव का इस्तेमाल करके इस मुहिम को अंजाम दें। हम चाहते हैं कि दुनिया में विलुप्त हो रही पशु-प्रजातियों को समय रहते बचा लिया जाए।

वन्य-जीव अपराध
हम सबके लिए यह चिंता की बात है कि दुनिया में पशु-तस्करी और वन्य-जीव व्यापार तेजी से बढ़ रहा है। दुनिया में भारी मुनाफे वाले चार बड़े गैर-कानूनी व्यापार हैं और वन्य-जीव व्यापार उनमें से एक है। मानव तस्करी, हथियार, ड्रग्स बिक्री के बाद वन्य-जीव तस्करी एक ऐसा अपराध है, जिसमें अंधाधुंध कमाई है। माना जाता है कि इस गैर-कानूनी धंधे में सालाना करीब दस से 20 अरब डॉलर की कमाई होती है। यह धंधा किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। तस्करी करने वाले अपराधी बड़े स्तर पर सीमाओं को पार कर दूसरे देशों में धंधा करते हैं। दुनिया में उनका बहुत बड़ा नेटवर्क है। शायद आपको लग रहा होगा कि इस धंधे की वजह से इंसानों को कोई नुकसान नहीं होता है। आप गलत सोच रहे हैं। पशुओं की हत्या और तस्करी वाले लोग हर दिन फॉरेस्ट रेंजर की हत्या करते हैं। पिछले दस साल में सैकड़ों फॉरेस्ट रेंजरों की हत्या हो चुकी है। वे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं, इससे भी लोगों को नुकसान होता है।

आतंकवाद से तार
एजेंसियों को इस बात के भी सबूत मिले हैं कि पशु तस्करी से जुड़े माफिया आतंकवाद के लिए धन मुहैया कराते हैं। यह बेहद गंभीर मुद्दा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दुनिया भर में वन्य-जीवों से जुड़ा धंधा तेजी से बढ़ रहा है। चिंता की बात यह है कि समय के साथ गैर-कानूनी शिकारी और पशु तस्कर बहुत ही संगठित और नियोजित ढंग से  धंधा करने लगे हैं। वे आधुनिक तकनीक की मदद से आसानी से अपनी हरकतों को अंजाम दे रहे हैं। वे अब अंतरराष्ट्रीय गैंग के रूप में संगठित हो गए हैं। वे इंटरनेट के जरिये वन्य-जीवों से बनने वाले उत्पाद ऑनलाइन बेच रहे हैं। अब उनके लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने उत्पाद बेचना और मोटी रकम वसूलना कहीं ज्यादा आसान हो गया है।

हमारी मुहिम
यह सच कि पशु तस्कर कहीं ज्यादा चालाकी से काम कर रहे हैं, लिहाजा हमें भी अब सावधानी से एकजुट होकर उन्हें रोकना होगा। इसके लिए पूरी दुनिया के नेताओं को मिलकर आवाज उठानी होगी। बेहतर होगा कि हम आपसी मतभेद भुलाकर इस संजीदा मुद्दे पर विचार करें। हमें एक स्वर में कहना होगा कि हम दुनिया में पशुओं की हत्या और तस्करी नहीं होने देंगे। हमें वन्य-जीव धंधे से जुड़ी मांग और आपूर्ति, दोनों को खत्म करना होगा। हम सबको प्रतिज्ञा करनी चाहिए कि हम अपने देश में इस धंधे को पनपने नहीं देंगे। मुझे खुशी है कि युनाइटेड फॉर वाइल्डलाइफ फाउंडेशन ने दुनिया के सात अन्य संगठनों के साथ मिलकर इस दिशा में काम शुरू कर दिया है।

पांच कार्य
दुनिया में वन्य-जीवों की रक्षा के लिए हमने पांच ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है, जहां काम करने की जरूरत है। अगर आप और सुझाव देंगे, तो हम अन्य क्षेत्रों को भी अपने एजेंडे में शामिल करेंगे। पहला, हमें विलुप्त हो रही पशु प्रजातियों को बचाना चाहिए। मुझे लगता है कि नई तकनीक हमें इस काम में काफी मदद कर सकती है। जैसे जीपीएस ट्रैकर और ड्रोन विमान। इनकी मदद से हम जंगलों में पशुओं की मौजूदी का पता लगाकर उनके संरक्षण के उपाय कर सकते हैं। इनसे हमें विलुप्त प्रजातियों के बारे  में सही जानकारी एकत्र करने में भी मदद मिलेगी। दूसरा, हमें मार्केटिंग विशेषज्ञों और देशों के युवा नेताओं की मदद से लोगों को जागरूक करना चाहिए, ताकि बाजार में वन्य-जीवों से जुड़े उत्पादों की मांग कम हो सके। तीसरा, हमें न्यायिक और पुलिस व्यवस्था को दुरुस्त करना होगा, क्योंकि पुलिस और कोर्ट की मदद के बिना इस अपराध को रोकना मुमकिन नहीं है। चौथा, हमें निजी क्षेत्र कीकंपनियों को इस बात के लिए राजी करना चाहिए कि वे किसी भी हालत में इस धंधे में सहयोग नहीं करेंगी। पांचवां, सबसे अहम बात यह है कि हमें तय करना होगा कि वन्य-जीव संरक्षण का सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिले।

बेहतर भविष्य
मैं जानता हूं कि आप सब वन्य-जीव संरक्षण को लेकर संजीदा हैं। मुझे पता है कि आप में से बहुत लोग पहले से इस दिशा में काम कर रहे हैं। हम लंबे समय से इस मुद्दे पर चर्चा करते रहे हैं, पर अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर इस मसले पर काम शुरू कर दें। कहीं ऐसा न हो कि हमारी आने वाली पीढ़ियां प्रकृति के बेशकीमती वन्य-जीवों को देखने से वंचित रह जाएं। हमें विलुप्त हो रही पशु प्रजातियों को बचना होगा, ताकि हमारे बच्चे और हमारे नाती-पोते उन पशुओं को देख पाएं। प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी

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