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'परिधान ऐसे जो समसामयिक भारत की झलक हों'

'परिधान ऐसे जो समसामयिक भारत की झलक हों'

मशहूर डिजयनर मनीष मल्होत्रा का मानना है कि स्थानीय शिल्पकला, संस्कृति और उसमें आधुनिकता का पुट भारतीय शिल्प को विश्व में लोकप्रिय बनाकर अलग पहचान दे सकता है।

देश के अग्रणी डिजायरों में गिने जाने वाले मनीष ने एक साक्षात्कार में बताया कि मिश्रित शिल्पकला, संस्कृति और आधुनिकता का पुट भारतीय शिल्प की खास बात है। इसका मतलब सिर्फ भारतीय परिधानों का आधुनिकीकरण नहीं है, बल्कि यह एक नई और अलग डिजाइन की ओर पहल है, जैसे साड़ी-जैकेट, लहंगा-अनारकली, लंबे कुर्ते-पल्लाजोस आदि।

मल्होत्रा (48) ने अक्सर अपनी परंपरागत शिल्प चिकनकारी, फुल्कारी और कश्मीरी एम्ब्रॉयडरी से परे जाकर भी अपने डिजाइनों में नए-नए प्रयोग किए हैं। उनके डिजाइनर परिधान भारतीय हस्तियों में काफी मशहूर और लोकप्रिय हैं और कई सारे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मौकों पर हस्तियां उनके तैयार किए गए परिधानों में खूबसूरती बिखेरती नजर आती हैं।

मनीष मानते हैं कि किसी और देश में भारत की तरह गहरी संस्कृति, कला मूल्य और महान इतिहास नहीं देखने को मिल सकता। वह कहते हैं, ‘‘एक डिजायनर होने के नाते यह मेरा अधिकार है कि अपनी विरासत को सहेजूं और ऐसे डिजाइन तैयार करूं, जो समसामयिक भारत की झलक पेश करता हो।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा लक्ष्य प्राचीन कलाओं को नए तरीके और नए दृष्टिकोण के साथ पेश करूं और उनको नई पहचान दिलाऊं। जैसा कि मैं हमेशा कहता हूं कि पूरी लंबाई की अनारकली आधुनिक कॉकटेल गाउन की तरह खूबसूरत लग सकती है। शुक्र है कि आजकल नामी हस्तियां ऐसे परिधान पहनकर गर्व महसूस करती हैं, जो हमारी प्राचीन विरासत का हिस्सा है।’’

मनीष को इस बात की भी खुशी है कि भारतीय पुरुषों ने भी अपने परिधानों के संग्रह में अब अलग अलग रंगों को अहमियत देना शुरू किया है।

उन्होंने कहा कि मुझे हमेशा से रंगों से प्यार रहा है और मेरे परिधानों में इस बात की झलक दिख जाती है। मुझे लगता है कि अब पुरुषों ने भी परिधानों में रंगों को अहमियत देना शुरू कर दिया है, खासकर पश्चिमी परिधानों में।

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