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दोषी डॉक्टर क्यों नहीं गिरफ्तार : डा. शिवजतन ठाकुर

पीएमसीएच घटना के लिए राज्य सरकार की ढुलमुल नीति जिम्मेवार है। पीएमसीएच में पिछले कई महीनों से मरीजों के परिजन पिटते आ रहे थे लेकिन सरकार व पुलिस प्रशासन मौन रहा। अगर सरकार शुरू में ही कोई कठोर कदम उठाती तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती? राज्य सरकार की नींद तब खुली जब पानी सिर के ऊपर बहने लगा। सुशासन की सरकार बड़े-बड़े अपराधियों के खिलाफ नकेल कस सकती है तो फिर पीएमसीएच के इन उदंड डॉक्टरों का क्यों नहीं? आखिर प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी दोषी डॉक्टरों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही है? क्या सुशासन में राजधर्म के पालन करने का तरीका यही है? दोषी डॉक्टरों को गिरफ्तार करने में पुलिस नाकाम क्यों हो गई है? दोषी डॉक्टरों को गिरफ्तार कर उनके मेडिकल रजिस्ट्रशन को रद्द किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी हरकतें नहीं हो। पूर राज्य की कानून-व्यवस्था में तो काफी सुधार हुआ है लेकिन पीएमसीएच में जंगल राज जैसा दृश्य है।ड्ढr ड्ढr पीएमसीएच के डॉक्टर पिछले कुछ दिनों से जो हरकत कर रहे हैं वह तो जंगल राज की पहचान है और पूर मानवता को शर्मसार कर देने वाली है। शायद किसी सभ्य समाज से ऐसी आशा नहीं की जानी चाहिए। एक तरफ राज्य सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार करने का प्रयास कर रही है जिससे अस्पतालों की हालत में काफी हद तक सुधार भी हुई थी लेकिन दूसरी तरफ पीएमसीएच के डॉक्टरों ने राज्य सरकार के सार प्रयास पर पानी फेर दिया। पीएमसीएच के हालात को लेकर पूर देश में राज्य की जो बदनामी हुई वह किसी से छिपी नहीं है। एक जमाने में पूर देश में पीएमसीएच की एक अलग छवि थी और यहां नामांकन लेना गौरव की बात मानी जाती थी। लेकिन इधर कुछ वर्षो में पीएमसीएच की स्थिति में जो गिरावट आई है वह काफी सोचनीय है। इस स्थिति पर अब सरकार के साथ-साथ पूर समाज को भी चिंतन करनी चाहिए कि आखिर समाज के बुद्धिजीवी (डाक्टर) ऐसी हैवानियत करने पर क्यों तुले हैं? आखिर ऐसी करतूत करके वे क्या हासिल करना चाहते हैं और पूर समाज में क्या संदेश देना चाहते हैं? क्या डॉक्टर ऐसी हरकत करके ही समाज की सेवा करना चाहते हैं? क्या एक सभ्य समाज डॉक्टर समुदाय से ऐसी ही उम्मीदें करता है।ं

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