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है दूसरी पारी पर जम रही हैं माधुरी

है दूसरी पारी पर जम रही हैं माधुरी

उनके जिक्र के बिना हिंदी फिल्मों की नायिकाओं की चर्चा अधूरी रहेगी। पहले भी वह सुर्खियों में थीं, आज भी चर्चा में हैं। उनका ‘सेंस ऑफ ह्यूमर’ भी जबर्दस्त है। जी हां, बात माधुरी दीक्षित की हो रही है। बढ़ती उम्र में भी वह गजब ढा रही हैं। ‘डेढ़ इश्किया’ के बाद ‘गुलाब गैंग’ में उनका अंदाज-ए-बयां गजब का है। एक ताजा मुलाकात में उन्होंने किया खुद से जुड़ी कई रोचक बातों का खुलासा

आप तो फिर से फिल्मों की हो गयीं?
पूरी तरह से ऐसा नहीं है। टीवी की छोटी-मोटी प्रस्तुति के अलावा मैं इन दिनों कोई फिल्म नहीं कर रही हूं, न ही ज्यादा काम मेरे एजेंडा में है। ‘डेढ़ इश्किया’, ‘गुलाब गैंग’ जिस तरह की फिल्में मैं कर रही हूं, उससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मैं कितने आराम से हर फिल्म करना चाहती हूं। फिर परिवार को भी पूरा समय देना है।

क्या करियर के शुरू में इस तरह के रोल कर पातीं?
शायद नहीं, क्योंकि ये रोल काफी मेच्योर नेचर के हैं। उस समय मेरी इमेज भी आड़े आ जाती थी। मैं तो हर समय चैलेंजिंग रोल करने के लिए तैयार थी, पर सभी कहते थे कि कुछ ‘धक-धक’ जैसा हो जाये। खैर अब वैसी कोई अड़चन नहीं है, इसलिए कुछ अलग-सा काम करने का मजा भी आ रहा है।

इसलिए जूही और आप अब आसानी से साथ काम कर लेती हैं?
ऐसा नहीं है। मैंने अपने करियर के शुरू में भी दो हीरोइन वाली कई फिल्मों में काम किया है। हां, आज स्थिति थोड़ी-सी बदल चुकी है। आज हम ज्यादा से ज्यादा अलग और बेहतर करना चाहते हैं। आज हम दोनों ही ऐसा कह सकते हैं कि हमने कुछ अलग किया है।

‘गुलाब गैंग’ का किरदार मूल चरित्र से कितना मेल खाता है?
मैंने इस तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया है। मैंने इसे अपने ढंग से किया है। वैसे भी इस फिल्म की स्क्रिप्ट पुख्ता जानकारी पर आधारित है। किसी तरह के विवाद से बचने के लिए निर्देशक ने रिसर्च पर बहुत समय दिया है। मेरा ही नहीं, जूही का किरदार भी बहुत पावरफुल है। उसने बहुत अच्छा काम किया है।

वैसे एक हीरोइन दूसरे हीरोइन की तारीफ बहुत कम करती है?
यह तो मीडिया की सोच है। हम इतने बड़े तो नहीं है कि किसी से प्रेरणा ही ना लें। मेरे भी कुछ पसंदीदा कलाकार हैं, जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा और आज भी सीख रही हूं।

आप किन अभिनेत्रियों से प्रेरित रही हैं?
मुझे नरगिस, मीना कुमारी और मधुबाला बहुत पसंद हैं। तीनों ने मेरे दिलो-दिमाग में एक अलग जगह बना रखी है। आज के दौर की नायिकाओं में विद्या बालन, रानी मुखर्जी, करीना आदि बहुत अच्छी एक्ट्रेस हैं। मेरे समय की हीरोइनों में जूही, श्रीदेवी बहुत अच्छी अभिनेत्री थीं। एक और हीरोइन की बहुत याद आती है, वह है दिव्या भारती। वह जितनी सुंदर थी, उतना सहज अभिनय भी करती थी। उसके असमय चले जाने का दुख मुझे आज भी होता है।

अपने बच्चों को मुंबई में पढ़ता देख क्या आपको अपना बचपन याद आता है?
मैं ‘डिवाइन चाइल्ड हाई स्कूल’ में पढ़ती थी, जो मेरे घर के एकदम पास था। दो-तीन मिनट पैदल चल कर स्कूल पहुंच जाती थी। फिर हम लोग जुहू के आयरिश पार्क में चले गये। हमारा यह फ्लैट देव साहब के बंगले के पास था। वैसे बीच में मैं पापा-मम्मी के साथ अंधेरी के जेबी नगर में भी रहने लगी थी। तब फिल्मों में मैंने कदम रखा ही था। खैर, मैं स्कूल की बातें कर रही थी। स्कूल जाने में मुझे बहुत मजा आता था। पढ़ाई, सहेलियों के साथ गपशप, खेल-कूद, नृत्य के साथ मेरा बचपन बहुत अच्छा बीता। ऐसा लगता है, जैसे सब कुछ कल ही की बात हो।

मेरे सपनों का भारत
कई साल अमेरिका में बिताने के बाद मैं परिवार सहित फिर देश में आ गयी हूं। हाल में एक मीडिया पर्सन ने मुझ से सवाल किया कि आज के संदर्भ में मैं किस तरह के भारत का सपना देखती हूं। मुझे लगता है कि मैं अपने देश को और ज्यादा व्यवस्थित देखना चाहूंगी। देखिए एक लक्ष्य को तय कर और कंधे से कंधा मिला कर चलने से ही हम चौतरफा उन्नति करेंगे।

झूठ से सख्त नफरत
मुझे अपने आप में मशगूल रहना पसंद है। आप सीधे-सीधे कह सकते हैं कि मैं बहुत प्राइवेट पर्सन हूं। अपने निजी मामले में किसी की दखलअंदाजी मुझे अच्छी नहीं लगती। झूठ से मुझे सख्त नफरत है। मैं ऐसे लोगों से दूरी बना कर चलती हूं, जो बिना कुछ किये ही सब हासिल कर लेना चाहते हैं।

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