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सबको चित किया इम्तियाज ने

सबको चित किया इम्तियाज ने

इम्तियाज अली इन दिनों अपनी नयी फिल्म ‘हाईवे’ को लेकर फिर से चर्चा में हैं। अपनी फिल्मों की बदौलत संजीदा निर्देशक के तौर पर सामने आये इम्तियाज अली बचपन में आर्मी ज्वॉइन करना चाहते थे, लेकिन मां की वजह से उनकी यह ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी। असल में उन्हें लेकर मां को हमेशा एक डर लगा रहता था। इम्तियाज बताते हैं, ‘मां मुझे बाइक तक नहीं चलाने देती थी। वर्षों बाद हिसार की सैनिक छावनी क्षेत्र में शूटिंग के सिलसिले में गया था। वहां जाकर मेरी वर्षो पुरानी यह इच्छा पूरी हुई। फिर मुझे पहली बार राइफल चलाने का मौका मिला। असल में बंदूक बचपन में मेरा प्रिय खिलौना था। मेरे खिलौनों के कलेक्शन में कई बंदूक वाले खिलौने थे। घर में जब भी कोई आता था, मैं उसके पीछे बंदूक लेकर भागता था। इसलिए कभी नहीं सोचा था कि सचमुच की बंदूक चलाने का मौका मिलेगा, वह भी सेना के अधिकारियों के साथ।’ वे सारी बातें आज भी इम्तियाज के जेहन में अच्छी तरह से कैद हैं। उनके मुताबिक हिसार के छावनी क्षेत्र में एक शूटिंग प्रतियोगिता चल रही थी। तब इम्तियाज ने मजे के लिए प्रतियोगिता में सैनिकों के साथ अपना नाम भी दे दिया था। इम्तियाज उस वाकये को याद करते हुए बताते हैं, ‘असली बंदूक से पहली बार गोली चलाने का वह रोमांच आज भी महसूस करता हूं। एक नर्वसनेस थी, पर फायरिंग के समय मैंने खुद को इंडियन आर्मी का एक सदस्य समझ कर ही फायरिंग की थी।’ सबसे हैरान करने वाला तो प्रतियोगिता का नतीजा था। जी हां, उसमें इम्तियाज सबसे आगे थे, जबकि प्रतियोगिता में शामिल सारे प्रतियोगी मेजर या लेफ्टिनेंट थे। उस घटना को याद कर इम्तियाज बताते हैं, ‘वहां मौजूद कोई भी शख्स इस बात पर यकीन नहीं कर रहा था कि मैंने पहली बार बंदूक चलाई है।’ बाद में वहां मौजूद कमांडर इन चीफ ने उस शाम उनके सम्मान में एक पार्टी भी दी। इम्तियाज हंसते हुए कहते हैं, ‘पहली बार वहां सेना के कुछ अधिकारियों ने मुझसे कहा था कि मुझे आर्मी ज्वॉइन करनी चाहिए थी। बहरहाल इसका फायदा मुझे यह मिला कि उसके बाद से यूनिट के सारे सदस्य मुझसे डरने लगे।’

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