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बिहार: गठबंधन को लेकर कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें

बिहार: गठबंधन को लेकर कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें

लोकजनशक्‍ति पार्टी के एनडीए में शामिल होने के बाद गठबंधन को लेकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई है। पार्टी में एक बार फिर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ गठबंधन का विरोध शुरू हो गया है। इन नेताओं की दलील है कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के साथ गठबंधन से भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस की लड़ाई कमजोर पड़ सकती है। लिहाजा, नए विकल्प तलाशने चाहिए।

कांग्रेस रणनीतिकारों का मानना है कि कांग्रेस, राजद और लोजपा के गठबंधन से प्रदेश में अच्छा संदेश जाता। पर लोजपा के एनडीए में शामिल होने और राजद में बगावत से स्थिति बदल गई हैं। इस वक्त राजद के साथ गठबंधन से बहुत ज्यादा सियासी फायदा नहीं होगा। वहीं, लालू प्रसाद यादव के साथ गठबंधन से पार्टी को पूरे देश में भ्रष्टाचार से समझौता करने पर सफाई देनी पड़ेगी। बिहार प्रदेश कांग्रेस के ज्यादातर नेता अकेले चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। उनकी दलील है कि 2004 में पार्टी को सिर्फ चार फीसदी वोट मिले थे, पर 2009 में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ी थी। उस वक्त पार्टी को 40 में से दो सीट मिली थी, पर वोट प्रतिशत बढ़कर 10 फीसदी हो गया। 2010 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का वोट प्रतिशत घटकर 8.37 फीसदी रह गया था।
कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि पार्टी ज्यादा से ज्यादा सीट जीतना चाहती है, तो एक बार फिर जदयू के साथ गठबंधन की संभावनाओं को तलाशना चाहिए। हालांकि, जदयू तीसरे मोर्चे में शामिल है। पर पार्टी रणनीतिकार मानते हैं कि राजनीति में किसी भी संभावना को नकारा नहीं जा सकता। कांग्रेस मानते हैं कि अगले कुछ दिनों में इस बारे में कोई फैसला किया जा सकता है।

बिहार में गठबंधन को लेकर जितनी जल्दी हो अस्पष्टता दूर होनी चाहिए।
- शकील अहमद, कांग्रेस महासचिव

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