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लावारिस सूटकेस के बहाने आतंकी कर सकते हैं रेकी

रांची। संवाददाता। रांची आतंकियों के निशाने पर है। रांची में इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों ने धमाकों की साजशि रची थी। तब फेलिन की वजह से रांची में आतंकियों के मंसूबों पर पानी फिर गया था। लेकिन शहर में लावारिस बैगों के जरिए रेकी की आशंकाएं मजबूत होने लगी हैं।

हाल के दिनों में कई बार शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके में लावारिस बैग मिले हैं। पुलिस के अधिकारी भी खुाल कर नहीं लेकिन दबी जुबान में यह बात स्वीकार करते हैं कि लावारिस बैग रख कर आतंकी इस बात की पड़ताल कर सकते हैं कि पुलिस की ऐसे बैग पर नजर जाती है या नहीं।

दो से तीन घंटे का लगता है वक्तशहर में जब कभी भी लावारिस बैग की बरामदगी हुई है, इसे खोलने में दो से तीन घंटे लग जाते हैं। मसलन स्थानीय पुलिस को जब सूचना मिलती है पुलिस मौके पर पहुंच कर झारखंड जगुआर के बम निरोधक दस्ते को सूचना देती है। बम निरोधक दस्ते को मौके पर पहुंचने में एक से डेढ़ घंटे तक का वक्त लगता है। कब-कब मिले लावारिस बैगपिछले साल पेंटालून माॉल के पास लावारशि अवस्था में बैग मिला था।

तकरीबन दो घंटे की अफरातफरी के बाद बैग खोला गया था। हरमू रोड में विशाल मेगा मार्ट के पास भी लावारिस बैग मिलने से सनसनी मच गई थी। साल 2012 में मेन रोड में डेली मार्केट के बाहर लावारिस बैग मिला था। तब पूरा शहर तीन से चार घंटे डिस्टर्व रहा था। चर्च कांप्लेक्स, पीपी कंपाउंड के पास एक ही दिन तीन-तीन लावारिस बैग मिलने से पुलिस और बम निरोधक दस्ते को काफी परेशानी हुई थी।

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