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बच्चों को इस बार भी समय पर नहीं मिलेंगी किताबें

रांची। प्रशांत झा। हर वर्ष की तरह इस बार भी बच्चों को समय पर किताबें नहीं मिलेंगी। सरकार द्वारा अभी तक किताब छापने के लिए टेंडर ही तय नहीं किया जा सका है। टेंडर तय होने के बाद किताब छापने के लिए 72 दिन का समय लग जाएगा।

यानी अप्रैल से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र के लिए किताबें जून-जुलाई से पहले बच्चों के हाथों तक नहीं पहुंचेगी। पहले 1 मार्च को टेंडर तय करना था, अब नए निर्णय के तहत 11 मार्च तक टेंडर तय होने की उम्मीद है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को मुफ्त में किताबें दी जाती हैं।

जनवरी में निकला था टेंडर: सर्व शिक्षा अभियान की ओर से 24 जनवरी को किताबों की छपाई के लिए टेंडर आमंत्रित किया गया। फरवरी मध्य तक इसे फाइनल करना था। शिक्षा विभाग के सचवि ने 20 फरवरी को पत्र जारी करते हुए टेंडर जमा करने की तारीख 1 मार्च दो बजे तक और टेंडर खोलने का समय 3 बजे का रखा। अब एक बार फिर इस समय सीमा को बढ़ाया जा रहा है।

निदेशक का रिक्त पद बना रोड़ा: सर्व शिक्षा अभियान में लंबे समय से निदेशक को लेकर समस्य चल रही थी। पूर्व निदेशक जनवरी में लंबी छुट्टी पर चली गई। लंबे इंतजार के बाद के 11 फरवरी को शिक्षा विभाग के प्रधान सचवि के विद्यासागर को निदेशक का प्रभार दिया गया। उन्होंने टेंडर आमंत्रित करने के लिए विज्ञापन निकाला। इस बीच उन्हें प्रभार मुक्त करते हुए पूजा सिंघल को सर्व शिक्षा अभियान का निदेशक बनाया गया।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि टेंडर को फाइनल करने के लिए निदेशक का होना जरूरी है। टेंडर जमा करने के लिए समय सीमा बढ़ाया जा रहा है। नव पदास्थापित निदेशक पूजा सिंघल ने तकनीकी कारणों से टेंडर जमा करने के लिए 11 मार्च तक का समय बढ़ाए जाने के फैसले की पुष्टि की है। ‘हमने समय पर किताब उपलब्ध कराने का पूरा प्रयास किया था। बीच में अधिकारियों के पद रिक्त रहने और अन्य तकनीकि कारणों से थोड़ी देर हो गई।

टेंडर फाइनल होने के बाद जल्द से जल्द किताब उफलब्ध कराने का प्रयास होगा। ’-गीताश्री उरांव, शिक्षा मंत्री।

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