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आइएएस भी चाहते हैं पढ़ाई के अनुसार मिले विभाग

रांची। हिन्दुस्तान ब्यूरो। राज्य के आइएएस अधिकारियों का मानना है कि जिस विषय की पढ़ाई कर यूपीएससी में सफल रहे, उस विषय के अनुसार विभाग मिले तो बेहतर एक्पोजर मिलेगा। चीजों को भी बेहतर तरीके समझ सकेंगे। हालांकि ऐसा अब तक कोई नियम नहीं बना है। नियमत: आइएएस के पदस्थापन में शैक्षिणक रिकॉर्ड देखने का कोई भी प्रावधान नहीं है। अधिकारी को किसी भी विभाग में पदस्थापित किया जा सकता है।

राज्य के आइएएस अधिकारियों के पास कई तरह के शैक्षिणक अनुभव है। जर्निलस्ट के रूप में करना पड़ता है काम राज्य के आइएएस अधिकारियों की मानें तो आइएसएस सेवा में आने के बाद किसी भी काम को संभालना पड़ता है। चाहे व लॉ एंड ऑडर्र का मामला हो यह गांव के विकास का। 1

6 साल तक उन्हें जर्नलिस्ट की तरह विभिन्न क्षेत्रों में काम करना पड़ता है। इसके बाद उन्हें विशेषज्ञता हासिल करने की जरूरत होती है। उसके बाद वे सचिव रैंक तक पहुंच जाते हैं।

केंद्रीय विभागों में क्या है प्रावधान भारत सरकार के अधीन विभागों में किसी भी आइएएस अधिकारियों का पदस्थापन पांच साल के लिए किया जाता है। इसके पीछे तर्क है कि वह अधिकारी उस विभाग में दक्षता हासिल कर ले। चीजों को बेहतर तरीके से समझ सके।

डेढ़ साल पहले आया था पीएमओ से पत्रः डेढ़ साल पहले राज्य सरकार को प्रधानमंत्री कार्यालय ने पत्र भेजा था। इसमें में सरकार से पूछा गया था कि क्या अखिल भारतीय सेवाओं की प्रासिंगकता खत्म हो गई है।

इसके लिए सभी राज्यों से आइएएस अधिकारियों का ब्योरा भी मांगा गया था। आइएफएस और आइपीएस को तवज्जो नहीं देते आइएएस पुलिस विभाग का सचिव (गृह सचिव) आइएएस होता है। आइएफएस अधिकारियों का भी सचिव आइएएस ही होता है।

भारत सरकार में आइएफएस को संयुक्त सचिव का पद मिलता है पर यह सेलेक्शन पोस्ट है। वहीं सेक्रेट्री आइएएस का संवर्गीय पद (कैडर पोस्ट) है। इस कारण भारतीय वन सेवा के अधिकारी विशेष सचिव तक ही पहुंच पाते हैं। कौन पद किसके बराबर है आइएएस आइएफएस सचिव मुख्य वन संरक्षक प्रधान सचिव अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुख्य सचिव प्रधान मुख्य वन संरक्षक(ग्रेड पे-80000 रुपए) आइएएस का पद चाहते हैं आइपीएस कारा महािनरीक्षक के पद पर आइएएस तैनात किए जाते हैं, जबकि आइपीएस चाहते हैं कि इस पर पद पर उनकी तैनाती हो।

इसी तरह गृह सचिव के पद पर भी आइपीएस की तैनाती की वकालत की जाती है। केंद्र में सचिव के कुछ पदों पर गैर आइएएस तैनात होते हैं। लंबे समय तक केंद्र में ऊर्जा सचिव रहे आरबी शाही आइएएस नहीं थे। आइपीएस अधिकारियों का कहना है कि आइएएस के 30 प्रतिशत ऐसे पद हैं,जिंस पर आइएएस काम ही नहीं करना चाहते। वैसे पदों पर आइपीएस अधिकारियों को तैनात किया जा सकता है।

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