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भाजपा के रेल रोको मुहिम से 10 करोड़ का घाटा

पटना। भाजपा के रेल चक्का जाम आंदोलन से रेलवे को करोड़ो के राजस्व का नुकसान हुआ है। पटरियों पर खड़े ट्रेनों के डीजल इंजन घंटों तक डीजल डकारते रहे।

टिकट रिफंड कराने के लिए विभिन्न स्टेशनों पर भीड़ रही। सूत्रों की मानें तो कुल मिलाकर रेलवे को शुक्रवार के दिन 10 करोड़ की चपत लगी है। सीधे आधा पहुंच गया आंकड़ा आंदोलन को देखते हुए शुक्रवार को हजारों यात्रियों ने रेलयात्रा से परहेज किया। जिन्होंने टिकट ले ली थी, वे ट्रेनों के लेट होने से टिकट रिफंड कराया। केवल दानापुर में ही अनारक्षित टिकटों से होने वाली आय में 50 प्रतिशत का नुकसान हुआ। शाम पांच बजे तक रेलयात्रियों की संख्या आधी हो गई थी।

दानापुर रेल मंडल में सुबह पांच से शाम पांच बजे तक रोज औसतन 1.31 लाख से ज्यादा अनारक्षित टिकट बिकते हैं। शुक्रवार को यह आंकड़ा मात्र 57.577 हजार रहा। इतने समय में अनारक्षित टिकटों से कमाई लगभग 66.21 लाख रुपए है। शुक्रवार को यह आंकड़ा लगभग 31.37 लाख तक ही पहुंचा।

मतलब केवल अनारक्षित टिकटों के हिसाब में भी दानापुर रेल मंडल को 35 लाख का नुकसान हुआ है। आरक्षित टिकटों में यह आंकड़ा चार गुणा ज्यादा है। रेलवे के सूत्र बताते हैं कि पांचों डवििजन में टिकट बिक्री से रेलवे को सात करोड़ का नुकसान हुआ है।

पार्सल व अन्य मद में आय को जोड़ें, तो लगभग दो करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। क्यों बंद नहीं होता डीजल इंजन दानापुर रेल मंडल सहित पूरे जोन के नॉन इलेक्ट्रिक लाइन पर डीजल इंजन चलते हैं।

रेल अधिकारियों की मानें तो ट्रेनों के खड़े रहने की स्थिति में इंजनों को बंद नहीं किया जा सकता। क्योंकि जितनी डीजल की खपत इंजन के एक घंटे चलने में खर्च होती है, उससे दस गुना ज्यादा डीजल इंजन के स्टार्ट करने में खर्च होता है।

इसलिए इंजन को स्टार्ट ही रखा जाता है। शुक्रवार को पूर्व मध्य रेलवे में लगभग 50 डीजल इंजन पांच घंटे खड़े रहे, जिससे लगभग 30 लाख का नुकसान हुआ। औसतन एक इंजन एक घंटे में 24 लीटर डीजल गटक जाती है। वहीं अगर इंजन को बंद कर दिया जाए, तो स्टार्ट होते ही 250 लीटर डीजल एक बार में खर्च हो जाते हैं।

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