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चावल खरीद की अवधि बढ़ाने में केन्द्र कर रहा टालमटोल

पटना। हिन्दुस्तान ब्यूरो। राज्य की राइस मिलों में चार लाख टन चावल पड़ा है। एफसीआई के चावल नहीं खरीदने से यह परेशानी हुई है। वह गुणवत्ता की कमी बता कर चावल की खरीद नहीं कर रहा है। इसके अलावा केंद्र चावल खरीद की अवधि बढ़ाने में भी टालमटोल कर रहा है।

राज्य सरकार ने खरीद की अवधि कम से कम 31 मार्च तक बढ़ाने के लिए कई बार पत्र लिखा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र का तर्क है कि मिलिंग अवधि में तीन माह का ही विस्तार किया जा सकता है। बिहार इस नियम का लाभ ले चुका है।

खरीद के मामले में भी बिहार से भेदभाव सामने आया है। पोषक मात्रा की कमी, बदरंग होने आदि जिन तर्को से बिहार के चावल को रद्द किया गया, वहीं पंजाब के लिए सारे मानक को शिथिल कर सीएमआर स्वीकार किए गए।

उनके लिए खरीद की तारीख भी बढ़ा दी गई। वैसे इसके मूल में राज्य में धान खरीद प्रक्रिया देर से शुरू होना और मिलों से अनुबंध चार माह विलंब से किया जाना भी है। इससे धान की कुटाई में अनावश्यक विलंब होता है।

नमी मापक यंत्र नहीं होने से खरीद के दौरान धान की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जाता। जिससे प्रति क्विंटल धान से औसतन 62 किलोग्राम ही चावल निकल पाता है, जबकि उन्हें 67 किलोग्राम चावल जमा करना होता है।

उधर, राज्य खाद्य निगम गोदामों की कमी बताकर चावल लेने से इनकार कर देता है। अब मिलरों को दिए गए धान के बदले चावल लेने से इनकार करते हुए उनसे पैसे मांगे जा रहे हैं। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।

क्या कहते हैं मिलरः बिहार राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रामकुमार झा के मुताबिक मिलरों का राज्य खाद्य निगम से एग्रीमेंट होता है। पिछले दो सीजन का जो धान दिया गया, उसे कूटा गया। अब सरकार चावल के बदले रुपए मांगती है।

समय पर धान नहीं देने और मात्र दस रुपए क्विंटल कुटाई दर के कारण हजारों मिलर परेशान हैं। मिलरों को सीधे सरकारी दर पर धान खरीदने की एजेंसी बनाने, बकाया चावल की आपूर्ति के लिए 30 अप्रैल 2014 तक का समय देने आदि दस सूत्री मांग सरकार से की गई है।

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