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राजरंग

दोस्त-दोस्त ना रहा..अमानत में खयानत! बंधु-बांधव और शाहों के शाह की दोस्ती पूर राज्य में चर्चित है। दोनों मिलकर एक से एक खेल करते रहते हैं। एक गेम तो एसा किया कि अजरुन भाई सड़क पर आ गये। कहा जाता है कि कभी इन दोनों मित्रों ने रात बाथरूम में गुजारी है। दोस्ती कितनी प्रगाढ़ है, इससे इस बात को समझा जा सकता है। दोस्ती की मिसाल देखिए कि दोनों हनी ब्रदर के खिलाफ दिल्ली तक लॉबिंग कर आये। शाहों के शाह तो बंधु-बांधव की बात मानकर उनके क्षेत्र में चिकित्सालय और अन्य सुविधायें दे रहे हैं। ऐसे में शाहों के शाह को भी यह उम्मीद है कि बांधव भाई उनका ख्याल रखें। कम से कम ऐसा कर दें कि उनके क्षेत्र में उनकी साख बनी रहे। लेकिन भाई बंधु तो अपने मन के राजा है। जो चाहते हैं, वहीं करते हैं। बांधव भाई अपने आवास पर मिलने आने वालों से सख्ती से बात करते हैं। कभी-कभी यह फितरत अपने मित्र शाहों के शाह पर भी चला देते हैं। बांधव ने बिना सलाह-मश्विरा किये मित्र के क्षेत्र से शिक्षा के दो अधिकारियों-पदाधिकारियों को खिसका दिया। अब दोस्ती में तो ऐसा नहीं होता है। एक-दूसर का ख्याल तो रखना पड़ेगा ना। शाही भाई बस इतना कहकर रह गये कि क्या दोस्त अब यही होगा?

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