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हिन्दू विवाह कानून ने घर तोड़े चयादा,जोड़े कम

तलाक के मुकदमों की बढ़ती संख्या से चिन्तित सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हिन्दू विवाह कानून घरों को जोड़ने की बजाय तोड़ रहा है। इसने देश में परिवार-प्रणाली का नुकसान यादा किया है।ड्ढr न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और जीएस सिंघवी की अवकाशकालीन पीठ ने मंगलवार को यह बात कही। पीठ ने इस बात पर अफसोस जताया कि तलाक के बढ़ते मामलों का बच्चों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है। पीठ ने कटाक्ष करते हुए कहा कि हालत यह हो गई है कि शादी के समय ही अग्रिम तलाक की याचिकाएँ दाखिल की जा रही हैं।ड्ढr हिन्दू विवाह कानून 1में लागू हुआ था। 2003 तक इसमें कई संशोधन किए जा चुके हैं। इस कानून में विवाह की वैधता, क्षतिपूर्ति, वैवाहिक अधिकार और तलाक से जुड़े विभिन्न प्रावधान हैं। तलाक की अवधारणा ब्रिटिश कानून से प्ररित है।ड्ढr बच्चे को हासिल करने के लिए दाखिल एक तलाकशुदा व्यक्ित की याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि बच्चे की भलाई के लिए माता-पिता अपने अहं को त्याग दें। न्यायमूर्ति पसायत ने पीठ की ओर से व्यवस्था देते हुए कहा कि उन्हें अलग हुए दंपति के आरोपों-प्रत्यारोपों से यादा बच्चे के हित की फिक्र है। सार दुष्परिणाम आखिरकार बच्चे को भुगतने पड़ते हैं। अगर वह लड़की है तो खासतौर पर उसकी शादी के समय यह मुश्किल और बढ़ जाती है। दिल्ली हाईकोर्ट ने गौरव और सुमेधा नागपाल के आठ साल के बच्चे को माँ सुमेधा की देखरेख में सौंपने के निर्देश दिए थे। गौरव ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी। बच्चा फिलहाल पिता की देखरेख में है।

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