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गैंगमैन से तो हम कुली ही अच्छे

हाारों कुलियों ने गैंगमैन की सरकारी नौकरी ठ़ुकरा दी है। मुम्बई, दिल्ली, हावड़ा, चेन्नई व अहमदाबाद ौसे स्टेशनों के 30 से 40 फीसदी कुलियों ने पुराने धंधे को बेहतर माना है। इलाहाबादोोन के ऐसे ही र्दानों कुलियों ने वाइिनग के बाद अपना बिल्ला वापस दिएोाने की माँग की है। लखनऊ और वाराणसी के कुलियों ने भी ऐसी ही मंशाोाहिर की है।ड्ढr गैंगमैन को महीने भर में अधिकतम साढ़े छह हाार रुपए वेतन मिलता हैोबकि बड़े स्टेशनों के 50 फीसदी कुलियों की आमदनी इससे कहीं यादा है। छोटे स्टेशनों के कुलियों के लिए गैंगमैन की नौकरीोरूर अहम है। रल अधिकारियों की मानें तो मुम्बई, दिल्ली, चेन्नई, हावड़ा, बंगलुरू,ोयपुर, अहमदाबाद, आगरा, चण्डीगढ़, गुवाहटी, न्यूोलपाईगुड़ी, पटना और पुरी ौसे स्टेशनों के 30-40 फीसदी कुली गैंगमैन की नौकरी को पहले ही ही ठोकर मार चुके हैं। इनमें से मुम्बई व दिल्ली सहित कई प्रमुख स्टेशनों के आधे से यादा कुली रोाना 500 से लेकर 1500 रुपए तक की कमाई करते हैं।ड्ढr इलाहाबादोोन के र्दानों कुलियों के हाथ-पैर तो हफ्ते भर में ही फूल गए। वह गैंती चलाने के बाद हथेली में उभर छालों को दिखा रहे हैं। कुली से सरकारी कर्मचारी बन चुके ऐसे र्दानों भारवाहकों ने इलाहाबाद मंडल कार्यालय में सम्पर्क कर दोबारा कुली बनाएोाने की गुहार लगाई है। इसी तरह अहमदाबाद डीआरएम दफ्तर से गैंगमैन बनाए गए कुलियों में से करीब 100 कुलियों ने वाइनिंग के बाद सरकारी नौकरी कर पाने में अस्मर्थता व्यक्त की है। वाराणसी व लखनऊ के भी कई कुलियों ने गैंगमैन कीोगह कुली बने रहने को तवज्जो दी है। उत्तर रलवे के कुली संघ के अध्यक्ष फतेह मोहम्मद कहते हैं कि गैंगमैन की नौकरी में मेहनत बहुत अधिक है लेकिन वेतन काफी कम। श्री अहमद बताते हैं कि देश के कई बड़े स्टेशनों के कुलियों का एक वर्ग गैंगमैन की नौकरी करने से मना कर चुका है। ड्ढr

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