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अश्लील भोजपुरी गीतों का बहिष्कार करने का आह्वान

अश्लील भोजपुरी गीतों का बहिष्कार होना चाहिए। युवा पीढ़ी को भोजपुरी के आदर्श लोकगीत व संस्कार गीतों से परिचित कराना जरूरी है। अन्यथा ऐसे गीत असमय ही नष्ट हो जाएंगे। अश्लील भोजपुरी गीतों के चलते ही भोजपुरी साहित्य व संस्कृति की रक्षा करना हर भोजपुरी भाषी का कर्तव्य है।ड्ढr ड्ढr एएन सिन्हा संस्थान में मंगलवार को भोजपुरी अकादमी द्वारा भोजपुरी अकादमी पत्रिका का लोकार्पण व अश्लील गीतों का सामाजिक बहिष्कार विषयक संगोष्ठी में अकादमी के अध्यक्ष सह निदेशक गोपाल जी ने उक्त बातें कहीं। इसके पूर्व रिटायर्ड आईएएस राम उपदेश सिंह विदेह, हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा.जगदीश पांडेय व बलभद्र कल्याण ने भोजपुरी अकादमी पत्रिका का संयुक्त रूप से लोकार्पण किया।ड्ढr ड्ढr गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने अश्लील गीतों की सूची बनाने व उसका विश्लेषण करने पर जोर दिया। साथ ही अश्लील गीतों के लेखन व प्रसारण को रोकने के लिए कानून बनाने, केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड व उसके क्षेत्रीय कार्यालयों को चुस्त-दुरुस्त बनाने, अश्लील गीतों का निर्माण करने वाली कंपनी को काली सूची में डालने, इसके लिए टास्कफोर्स बनाने, अश्लील गीत गाने वाले गायकों को सम्मानित नहीं करने व सामाजिक बहिष्कार करने, सामाजिक बहिष्कार के लिए जनआंदोलन शुरू करने की मांग की गयी। गोष्ठी में गिरीशचंद्र दुबे, जनार्दन प्रसाद द्विवेदी, रवीन्द्र वर्मा, मिथिलेश कुमारी मिश्र, कमला प्रसाद ने भी अपने विचार रखे।

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  • Web Title: अश्लील भोजपुरी गीतों का बहिष्कार करने का आह्वान